महाशिवरात्रि पर कोयंबटूर में अध्यात्म का अनूठा आयोजन
इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए लंदन से यहां आए किरित ने आईएएनएस को बताया, "जब मैं कैट की परीक्षा में विफल हुआ तो बहुत निराश हो गया था। उस दौरान मैंने धार्मिक टीवी चैनल देखना शुरू किया। एक दिन मैंने सद्गुरु जग्गी वासुदेव का वीडियो देखा। उसके बाद से आध्यात्म की ओर मेरा रुझान हुआ।"
चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे पांडिचेरी के एक छात्र प्रबु ने कहा, "मैं महसूस करता हूं कि सदगुरु का चिंतन विज्ञान पर आधारित है। ध्यान हमारी आंतरिक ऊर्जा को बढ़ाने की एक बेहतरीन कला है।"
सदगुरु जग्गी के सान्निध्य में आयोजित शुद्धिकरण की साधनाओं में तीन लाख श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
इस आध्यात्मिक साधना में हिस्सा लेने के बाद लोगों ने पूर्ण शांति का अनुभव किया। विभिन्न प्रक्रियाओं से होकर संपन्न हुई इस साधना में संगीत और पंचभूत आराधना का विशेष महत्व रहा।
ईशा फाउंडेशन के दुनिया भर में 150 केंद्र हैं। करीब 250,000 स्वयंसेवक योग और ध्यान के माध्यम से लोगों के भीतर आत्मिक उत्थान पैदा करने के अलावा पर्यावरण जागरुकता, सामाजिक वानिकी और ग्रामीण शिक्षा के कामों में जुटे हुए हैं।
प्रार्थना, धार्मिक जाप, ध्यान, योग, संगीत और नृत्य के रात भर चले इस आयोजन में पांच हजार विदेशी श्रद्धालुओं ने भी हिस्सा लिया।
शिवरात्रि समारोह की शुरुआत अपराह्न् 5.40 बजे ध्यानलिंग मंदिर में हुई। संगीत और मंत्र जाप समारोह के मुख्य आकर्षण रहे। समारोह में पंडित हरि प्रसाद चौरसिया के बांसुरी वादन ने हर किसी को मोह लिया। यह आयोजन सुबह तक चला।
इस अवसर पर सदगुरु वासुदेव ने कहा, "जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं तो शिवरात्रि का अवसर बनता है। इस कारण इस दिन स्वाभाविक रूप से ऊर्जा में अभिवृद्धि हो जाती है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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