प्राकृतिक रोग प्रतिरक्षी के कम स्तर से आघात का खतरा
स्वीडन के कारोलिंस्का संस्थान (केआई) के शोधकर्ताओं ने ऐसे टीके को विकसित करने की उम्मीद जताई है, जिससे शरीर खुद-ब-खुद धमनी संबंधी दिक्कतों और आघात से अपनी रक्षा करने में समर्थ हो सकेगा। रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर रक्त के थक्के जमने से धमनी संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
शोध की अगुवाई कर रहे केआई के प्रोफेसर जॉन फ्रोस्टेगार्ड ने शोध में प्रदर्शित किया कि एक उच्च स्तर के रोग प्रतिरक्षी (एंटी-पीसी) धमनी संबंधी दिक्कतों को कम करने में मददगार होता है।
धमनी संबंधी दिक्कतों का प्रमुख कारण रक्त का थक्का जमना और मायोकार्डियल इंफ्रैक्शन (एमआई) होता है। एमआई या तीव्र एमआई (एएमआई) को आमतौर पर हृदयाघात कहा जाता है। इसमें हृदय के हिस्सों में रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता, जिससे हृदय की कुछ कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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