गोवा में वन्यजीव कार्यकर्ता के समर्थन में उतरे नागरिक संगठन

केरकर पर पिछले वर्ष फरवरी में वन विभाग ने एक बाघ के शिकार करने संबंधी मामले में शिकारियों को उकसाने का आरोप लगाया था।

पणजी से 60 किलोमीटर दूर उत्तरी गोवा में महदेई वन्यजीव अभयारण्य में इस बाघ के शिकार के एक महीने बाद पत्रकार केरकर ने एक राष्ट्रीय अंग्रेजी दैनिक में इस घटना के बारे में चित्र सहित एक खबर प्रकाशित की थी।

इस मामले में वन विभाग ने तर्क दिया है कि केरकर ने इस विवादास्पद चित्र के मूल के बारे में अधिकारियों को सूचित नहीं किया था और ऐसा करके उन्होंने शिकारियों को शिकार के लिए उत्साहित किया।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी और स्थानीय न्यूज चैनल के संपादक अरविंद भाटीकर ने केरकर के समर्थन में आयोजित एक बैठक में शामिल होने के बाद आईएएनएस को बताया, "वन विभाग द्वारा केरकर के उत्पीड़न को हम सब को एक सबक के रूप में लेना चाहिए। गोवा में सरकार का विरोध करने पर कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के उत्पीड़न का प्रयास किया जा रहा है।"

हरित अभियान चलाने वाले देश के जाने माने कार्यकर्ता क्लाउडे अलवारेस ने कहा कि राज्य सरकार अत्यंत प्रभावशाली खनन उद्योग के प्रभाव में है और वह उसके इशारे पर बाघ शिकार मामले को दबाना चाहती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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