कुंभ पर्व : शाही स्नान के लिए नृत्य करते, झूमते-गाते पहुंचे साधु
हरिद्वार, 12 फरवरी (आईएएनएस)। कुंभ मेले में महाशिवरात्रि के दिन शुक्रवार को शाही स्नान के लिए निकले नागा साधु तलवारें और चांदी की गदा चमकाते, नृत्य करते, गीत गाते और कलाबाजियां खाते हुए पवित्र गंगा नदी पर स्नान के लिए पहुंचे। कुंभ मेले में स्नान के लिए शिवरात्रि को महत्वपूर्ण दिनों में से एक माना जाता है।
हिंदू मान्यता के मुताबिक महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का देवी पार्वती से विवाह हुआ था। बारह वर्षो के अंतराल के बाद आयोजित होने वाले कुंभ मेले का यह महत्वपूर्ण दिन है।
शाही स्नान को देवताओं के शाही दल के संदर्भ में भी समझा जाता है। शाही स्नान के समय यहां एक त्योहार जैसा माहौल होता है। विभिन्न अखाड़ों के साधु अपने-अपने अखाड़े के बाजे-गाजे के साथ पवित्र गंगा नदी में स्नान के लिए आते हैं और स्नान के दौरान पवित्र भजन गाते हैं।
गंगा नदी के दोनों किनारों पर शुक्रवार को हजारों साधु स्नान के लिए इकट्ठे हुए। जब नागा साधु नदी में उतरे तो अभिव्यक्तिविहीन से दिखने वाले उनके चेहरों पर रोमांच और उत्तेजना देखी गई। उस समय घाटों पर 'हर हर गंगे', 'जय गंगे मैया', 'हर हर महादेव' की गूंज सुनाई दे रही थी।
सात अखाड़ों को शाही स्नान में शामिल होना था। सबसे पहले जूना अखाड़े के साधुओं ने शाही स्नान किया। उनके बाद अग्नि और आह्वान अखाड़ों के साधु आए। जूना अखाड़े में सबसे अधिक नागा साधु शामिल थे।
मेले के प्रभारी अधिकारी आनंद वर्धन ने आईएएनएस को बताया कि पारंपरिक आस्था और विश्वास के मुताबिक सबसे पहले जूना अखाड़े के साधु शाही स्नान करते हैं।
अलग-अलग आयु के स्त्री-पुरुषों का विदेशी लोगों का एक छोटा सा समूह भी जूना अखाड़े का सदस्य था। इस समूह ने भी शाही स्नान में हिस्सा लिया।
शाही स्नान की एक झलक लेने के लिए देशी-विदेशी मीडियाकर्मी अपने कैमरों के साथ मौजूद थे।
शुक्रवार का शाही स्नान सुबह 5.30 बजे शुरू हुआ। अगले दो शाही स्नान 15 मार्च को सोमवती अमावस्या और 14 अप्रैल को बैसाखी के अवसर पर होंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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