ईरान पर प्रतिबंध का दायरा और बढ़ा

ईरान पर प्रतिबंध का दायरा और बढ़ा

अमरीका के वित्त मंत्रालय ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स पर पहले से लगे प्रतिबंध का दायरा बढ़ाकर इसे समूह के कुछ और सहयोगियों पर भी लागू कर दिया है. ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी और चार अन्य कंपनियों के खिलाफ अमरीका ने ये नया कदम विनाशकारी हथियार बनाने और उसे फैलाने के आरोप में उठाया है.

अमरीका ने ये कदम ऐसे वक्त उठाया है जब पहले ही उसने फ्रांस के साथ मिलकर ईरान पर चौथा प्रतिबंध लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र पर दबाव बना रखा है. ईरान ने मंगलवार को घोषणा की थी कि वह 20 प्रतिशत तक यूरेनियम का संवर्धन शुरू करने जा रहा है.

ईरान की इस घोषणा से परमाणु हथियारों के निर्माण को लेकर उसके मंसूबे एक बार फिर शक के दायरे में आ गए हैं. रिवोल्यूशनरी गार्ड ईरानी सेना का हिस्सा हैं और इसकी स्थापना 1979 की क्रांति के बाद की गई थी. अमरीका का वित्त विभाग रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के जनरल रोस्तम क़सेमी और ख़तम अल अनबिया नाम के उनके कंस्ट्रक्शन फ़र्म की चार सहयोगी कंपनियों की संपत्ति ज़ब्त करने की तैयारी कर रहा है.

ख़तम अल अनबिया पर 2007 में भी प्रतिबंध लगा दिया गया था. अमरीका के इस नए कदम के तहत केवल अमरीकी न्यायाधिकार में आनेवाली कंपनी की संपत्तियों पर ही कार्रवाई की जाएगी.

इस कार्रवाई से फिलहाल तो ख़तम अल अनबिया को ज़्यादा नुकसान नहीं होगा लेकिन लंबे समय में कंपनी को इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है क्योंकि दुनियाभर की कंपनियां जनरल और उनकी कंपनी के साथ कारोबार करने से बचना चाहेंगी. ख़तम अल अनबिया रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की इंजीनियरिंग के क्षेत्र में मदद करती है और सड़कें, सुरंग और पाइपलाइन बनाने का काम करती है.

आरोप

अमरीकी ट्रेज़री डिपार्टमेंट का आरोप है कि ख़तम अल अनबिया अपने कारोबारी मुनाफे़ के पैसे से ईरानियन रेवोल्यूशनरी गार्ड्स काउंसिल (आईआरजीसी) की ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देता है और इनमें विनाशकारी हथियारों को फैलाना और चरमपंथ को बढ़ावा देना भी शामिल है.

आईआरजीसी ईरान में बेहद शक्तिशाली है और राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद का समर्थन करती है. ट्रेज़री डिपार्टमेंट ने अपने बयान में कहा है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ईरान की अर्थव्यवस्था को भी नियंत्रित करते हैं. ये साधारण ईरानी कारोबारियों को हटाकर उनकी जगह ख़तम अल अनबिया जैसी कंपनियों को मज़बूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बाहरी दुनिया से संपर्क कायम रखा जा सके.

ईरान पर बढ़ता दबाव

अमरीकी वित्त विभाग के इस कदम से इस बात के संकेत मिलते हैं कि अलग-अलग देश अब किस तरह ईरान के अधिकारियों पर शिकंजा कसने की योजना बना रहे हैं ताकि ईरान पर संयुक्त राष्ट्र की तरफ से और प्रतिबंध लगाने के लिए दबाव बनाया जा सके.

जर्मनी ने पहले ही कहा है कि वो ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है. यहां तक कि रूस ने भी ऐसी ही राय ज़ाहिर की है. अमरीका ने फ़िलहाल बुश प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों को ही आगे बढा़ते हुए ईरान के खिलाफ कार्रवाई तेज़ कर दी है.

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