ऑक्सीजन की कमी से हवा में सांस लेते हैं पशु

शोधकर्ताओं ने उत्तर पश्चिमी आस्ट्रेलिया के गोगो से मिली लंगफिश की एक नई प्रजाति के जीवाश्म के परीक्षण के बाद यह दावा किया है।

आस्ट्रेलियन नेशनल युनीवर्सिटी (एएनयू) के शोधकर्ता एलिस क्लीमेंट और अमेरिका के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में कार्यरत जॉन लांग ने यह अध्ययन किया है।

लंगफिश की यह नई प्रजाति राइनोडिपट्रस मध्य-डेवोनियन काल में वैश्विक ऑक्सीजन के न्यूनतम स्तर से सम्बद्ध है। समुद्री लंगफिश की इस प्रजाति की खोज 2008 में हुई थी। ऐसा विश्वास किया जाता है कि यह अपनी तरह की पहली मछली है।

क्लीमेंट कहते हैं कि राइनोडिपट्रस में बहुत सी ऐसी विशेषताएं हैं जो बताती हैं कि यह मछली हवा में सांस लेती थी। उन्होंने कहा कि चूंकि यह मछली समुद्री जल में रहती थी इसलिए वह इस अवधारणा के विपरीत है कि मछलियों में सांस लेने की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब वे शुद्ध जल में रहती हैं।

डेवोनियन काल में ऑक्सीजन का स्तर कम होकर 12 प्रतिशत रह गया था जबकि वर्तमान में ऑक्सीजन का स्तर 20 प्रतिशत है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि इस अध्ययन से यह समझने में मदद मिलती है कि पृथ्वी पर जीवन किस तरह विकसित हुआ था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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