एचएएल ने की अमेरिकी लड़ाकू
गुलशन लूथरा
नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)।
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने दुर्जेय अमेरिकी सुपर हार्नेट लड़ाकू विमान, बोइंग एफ/ए-18ई/एफ के लिए कल-पुर्जो की आपूर्ति शुरू कर दी है। यह आपूर्ति भारत के वैमानिकी उद्योग को मिली वैश्विक पहचान का प्रतीक है।
रक्षा पत्रिका 'इंडिया स्ट्रेटजिक' के आगामी अंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, एचएएल, बोइंग कंपनी को पहले ही सुपर हॉर्नेट के लिए पांच जोड़ी गन बे डोर (जीबीडी) यानी तोप के मुंह में लगने वाले दरवाजे, भेज चुका है और शुरुआती करार के तहत 13 अन्य ऐसे दरवाजों का निर्माणा किया जा रहा है।
रिपोर्ट में एचएएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अशोक नायक के हवाले से कहा गया है कि कंपनी सेना और नागरिक उड्डयन क्षेत्र से जुड़े वैश्विक बाजार में बड़े कारोबार की संभावना तलाश रही है। इसके लिए कंपनी आगामी वर्षो में अपने कारखानों के आधुनिकीकरण के लिए 2.80 अरब रुपये का निवेश करेगी।
एचएएल ने ब्रिटिश जगुआर विमान के लिए भी पुर्जो की आपूूर्ति की है, जिसे भारतीय वायुसेना में 1970 में शामिल किया गया था। एचएएल अतीत में बोइंग और ईएडीएस एअरबस के लिए भी विमान के दरवाजों की आपूर्ति कर चुकी है, लेकिन अमेरिकी लड़ाकू विमान के लिए पहली बार भारत से पुर्जो की आपूर्ति की जा रही है।
बोइंग के रक्षा, अंतरिक्ष एवं सुरक्षा मामलों के भारत में प्रमुख व कंपनी के उपाध्यक्ष विवेक लाल ने नई दिल्ली में पत्रिका को बताया है कि एचएएल को मिला वर्तमान आर्डर भारत द्वारा एफ-18 सुपर हार्नेट की खरीदी से कोई संबंध नहीं रखता, बल्कि यह आर्डर बोइंग द्वारा एचएएल से 1 अरब डॉलर कीमत के पुर्जे और सेवाएं लेने का एक हिस्सा है।
जीबीडी के तहत सुपर हॉर्नेट के छह बैरल वाली 20 मिमी की एम61ए2 गैटलिंग बंदूक प्रणाली भी शामिल है, जो चार से छह हजार राउंड प्रति मिनट की दर से गोले बरसा सकती है। लेकिन अमेरिकी सैन्य प्रणालियों की प्रमुख कंपनी, जनरल डायनामिक्स द्वारा तैयार की गई इस बंदूक में सिर्फ 600 राउंड गोलियां ही भरी जा सकती हैं।
नायक ने कहा कि पिछले साल एचएएल ने अपनी वैश्विक रणनीति के तहत गल्फस्ट्रीम के 150 व्यापारिक विमानों के लिए भी कल-पुजरें की आपूर्ति की थी। इससे कंपनी का वार्षिक कारोबार फिलहाल लगभग तीन गुना बढ़ गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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