आतंकवाद, नक्सलवाद आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा : प्रधानमंत्री (राउंडअप)

नई दिल्ली, 7 फरवरी (आईएएनएस)। प्रधानंमत्री मनमोहन सिंह ने आतंकवाद, नक्सलवाद और सांप्रदायिक ताकतों को देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए इनसे निपटने के लिए समन्वित प्रयासों की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा संबंधी विभिन्न चुनौतियों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।

आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने रविवार को कहा, "आप सभी सुरक्षा संबंधी प्रमुख खतरों से वाकिफ हैं। विरोधी गुट और तत्व देश में आतंकवादी गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं। वे हमारे देश में आतंकवादी गतिविधियां फैलाने की साजिश रच रहे हैं। जम्मू एवं कश्मीर इन गुटों की कार्रवाई का खामियाजा भुगत रहा है।"

प्रधानमंत्री ने जम्मू एवं कश्मीर में सीमा पार से हो रही घुसपैठ की घटनाओं पर भी चिंता जाहिर की लेकिन उन्होंने कहा कि राज्य में आतंकवादी घटनाओं में 'उल्लेखनीय कमी' आई है। जम्मू एवं कश्मीर की कुछ घटनाएं परेशान करने वाली हैं।

मुंबई में वर्ष 2008 में हुए आतंकवादी हमलों को ध्यान में रखते हुए देश में तटीय सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "नवंबर 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले ने हमें तटीय सुरक्षा और मजबूत बनाने के लिए सचेत कर दिया है। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय तटीय सुरक्षा समिति गठित की गई है।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "अत्यंत सतर्कता तथा केंद्र व राज्य सरकारों के निरंतर और समन्वित प्रयासों की जरूरत है। हमें समय-समय पर प्रणालियों की समीक्षा और देश व नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर में उग्रवाद और हिंसक घटनाएं हो रही हैं। कई राज्य नक्सलवाद से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग समाज को सांप्रदायिक और क्षेत्रीय आधार पर बांटना चाहते हैं।

जाली नोटों की तस्करी संबंधी सभी मामलों की जांच में तेजी लाने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि जाली नोट से अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सीमा पार से जाली नोटों की तस्करी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा, "जाली नोट सीमा पार से देश में पहुंचते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए राज्यों और केंद्र को समन्वित प्रयास करने होंगे। हमारी अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है।"

पाकिस्तान की 'काली ताकतों' का मुंहतोड़ जवाब देंगे :

जम्मू एवं कश्मीर में सीमा पार से होने वाली घुसपैठ में हुई वृद्धि से बढ़े खतरों से आगाह करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने पाकिस्तान से गतिविधियां चलाने वाले आतंकवादी संगठनों को 'काली ताकतें' करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन ताकतों को भारत-विरोधी मंसूबों में कामयाब होने नहीं दिया जाएगा और सामना होने पर उनका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

चिदम्बरम ने कहा, "इस वर्ष की शुरुआत से ही सीमापार से घुसपैठ के मामलों में वृद्धि आई है। अब तक 16 आतंकवादियों को ऐसे प्रयासों के दौरान मारा जा चुका है जबकि 16 अन्य को गिरफ्तार किया गया है।"

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में गुरुवार को प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संबद्ध जमात-उद-दावा द्वारा आयोजित रैली का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि ये संगठन भारत विरोधी हैं। इस रैली में हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना ने हिस्सा लिया था।

चिदंबरम ने कहा, "मैं आपका ध्यान गत चार फरवरी को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हुई आतंकवादी गुटों की बैठक की ओर दिलाना चाहता हूं, जिसमें लश्कर-ए तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन ने हिस्सा लिया। यह स्पष्ट है कि ये गुट भारत-विरोधी हैं और जम्मू एवं कश्मीर पर कब्जा चाहते हैं..ये काली ताकतें कभी कामयाब न होंगी। जब इनसे सामना होगा तो हम उनका मुंहतोड़ जवाब देंगे।"

नक्सलवाद को गंभीर खतरा करार देते हुए चिदम्बरम ने कहा, "नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सलाह मशविरे के बाद हमने इसका कड़ाई से मुकाबला करने का फैसला किया है। नक्सली हमले में मारे गए लोगों की संख्या में वर्ष 2009 में इजाफा हुआ है और हो सकता है कि 2010 में भी यह संख्या बढ़े, लेकिन हमारे सुरक्षाबल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि प्रभावित राज्य सरकारें इन क्षेत्रों में अपना शासन स्थापित करेंगी।"

चिदंबरम ने यह जिक्र भी किया कि गत 14 महीनों में देश में कोई बड़ा आतंकवादी हमला नहीं हुआ है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि हम ढिलाई बरतें। "हमें तत्पर रहने की जरूरत है। हमें अपनी क्षमता बढ़ाने के कार्यो को जारी रखना चाहिए। आतंकवादी खतरों से निपटने और साम्प्रदायिक माहौल को बिगाड़ने के किसी भी प्रयास से बचने के लिए प्रशासन और संबंधित संस्थानों में सुधार की प्रक्रिया हमें जारी रखनी चाहिए।"

अजमेर शरीफ की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ की मांग :

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अजमेर स्थित विश्व प्रसिद्घ दरगाह शरीफ की सुरक्षा के लिए केन्द्र सरकार से केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) जैसी संस्था प्रदान करने की मांग की।

गहलोत ने कहा, "अजमेर शरीफ की सुरक्षा के लिए राज्य ने अपने संसाधनों से पुलिस बल नियोजित किया है, लेकिन पर्यटकों एवं सभी समुदायों के जायरीनों की भारी संख्या को देखते हुए तथा वर्ष 2007 में इस दरगाह पर हुए आतंकवादी हमले की पृष्ठभूमि में, दरगाह शरीफ की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ जैसी संस्था को देने पर विचार किया जाना बहुत जरूरी है। इस सम्बंध में राज्य सरकार का प्रस्ताव केन्द्र के समक्ष विचाराधीन है।"

आतंकवाद से लड़ने के लिए सख्त कानून जरूरी :

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सीमा पार आतंकवाद से लड़ने के लिए सख्त कानून बनाए जाने की जरूरत पर बल दिया। गुजरात संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक (गुजकोक) को हरी झंडी न दिए जाने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना भी की।

आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में हिस्सा लेने आए मोदी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "हमें अपने सुरक्षा बलों को मजबूत बनाने के लिए नई तकनीकों की आवश्यकता है। साथ ही सीमा पार आतंकवाद से निपटने के लिए कड़े कानूनों की भी जरूरत है।"

उन्होंने कहा, "हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं और ऐसे कानून मानवाधिकारों की भी रक्षा करेंगे।"

इससे पहले मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा को संगठित अपराध और आतंकवाद से खतरा है। इस चुनौती से निपटने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ-साथ कड़े कानूनों की भी आवश्यकता है।

गुजरात विधानसभा द्वारा पारित गुजकोक को केंद्र सरकार द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने को गुजरात के साथ अन्याय करार देते हुए मोदी ने कहा, "यह विधेयक दो-तिहाई बहुमत से गुजरात विधानसभा से पारित हुआ है। हमनें 2004 में इसे केंद्र के पास भेजा लेकिन उन्होंने इसे वापस लौटा दिया। इसमें वही सारे प्रावधान हैं जो महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) में हैं।" मोदी लंबे समय से इस विधेयक को मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेज रहे हैं।

रमन, मोदी ने की मनमोहन-चिदम्बरम की तारीफ :-

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने नक्सली हिंसा से निपटने के सिलसिले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है।

रमन सिंह ने कहा, "पिछले सात वर्षो के अनुभवों की तुलना में केंद्र सरकार से हमें अच्छा समर्थन मिला है। नक्सलियों से लड़ने के मामले में हम बेहतर और विश्वस्त महसूस कर रहे हैं।"

रमन सिंह ने बाद में पत्रकारों से चर्चा में कहा, "चिदम्बरम की सोच स्पष्ट है जबकि प्रधानमंत्री भी इसे गंभीरता से ले रहे हैं।"

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सुरक्षा के मुद्दे पर रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम की सराहना की। मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में हिस्सा लेने आए मोदी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "राज्यों से जब भी कुछ मांग की गई है तो गृह मंत्री और गृह सचिव का रुख हमेशा ही सकारात्मक रहा है।"

उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आतंकवाद और सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर नरम रवैया अपनाने का आरोप लगाती रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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