अग्नि-3 मिसाइल का सफल परीक्षण (राउंडअप)
अग्नि-3 के सफल परीक्षण के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है जिनके पास मध्यवर्ती श्रेणी की बैलिस्टिक मिसाइल (आईआरबीएम) हैं।
नई दिल्ली में एक अधिकारी ने बताया कि इस मिसाइल को सेना में शामिल किए जाने से पहले रविवार को चौथा और अंतिम परीक्षण किया गया।
रक्षा सूत्रों के अनुसार उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से करीब 200 किलोमीटर दूर भद्रक जिले के व्हीलर द्वीप स्थित प्रक्षेपण स्थल से सुबह 10.46 बजे 3,000 किलोमीटर की दूरी तक मार करने की क्षमता वाली 1.5 टन वजनी मुखास्त्र ले जाने में सक्षम इस मिसाइल का प्रक्षेपण किया गया। लक्ष्य के समीप स्थित दो पोतों ने मिसाइल को लक्ष्य को साधते हुए देखा।
देश की सबसे शक्तिशाली मिसाइल का यह चौथा और आखिरी परीक्षण था। यह मिसाइल चीन के भीतर तक वार कर सकती है। शंघाई और बीजिंग तक इसके दायरे में आ सकते हैं।
एकीकृत परीक्षण क्षेत्र (आईटीआर) के निदेशक एस.पी.दास ने आईएएनएस को बताया, "परीक्षण पूरी तरह सफल रहा। यह मिशन के सभी उद्देश्यों पर खरा उतरा। सब कुछ उम्मीद के अनुसार हुआ।"
एक अधिकारी ने कहा, "यह मिसाइल को सेना में शामिल किए जाने के पूर्व का परीक्षण था। भारतीय सेना ने इस संपूर्ण परीक्षण अभियान को डीआरडीओ के वैज्ञानिकों के दिशानिर्देश में संपन्न कराया है।"
अग्नि-3 का यह चौथा परीक्षण था। इसी परीक्षण स्थल से नौ जुलाई 2006 को इसका पहला परीक्षण विफल हो गया था। रॉकेट का दूसरा हिस्सा मिसाइल से फौरन अलग न हो सका था और वह लक्ष्य से पहले ही गिर गया था।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 12 अप्रैल 2007 और नौ मई 2008 को फिर मिसाइल का परीक्षण किया और दोनों परीक्षण सफल रहे।
अग्नि-3 दो चरणों की ठोस प्रणोदक मिसाइल है। इसकी लंबाई 17 मीटर और व्यास दो मीटर तथा वजन 50 टन है।
अग्नि-1 750-800 किलोमीटर मारक क्षमता वाली कम दूरी की मिसाइल है और अग्नि-2 1,500 किलोमीटर क्षमतावाली मध्यम दूरी की मिसाइल है। ये दोनों मिसाइलें पहले ही सेना में शामिल की जा चुकी हैं।
रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी ने अग्नि-3 के परीक्षण को उल्लेखनीय उपलब्धि बताया और इसे सफलतम बनाने के लिए डीआरडीओ प्रमुख वी.के. सारस्वत तथा अन्य वैज्ञानिकों को बधाई दी।
करीब 100 से अधिक रक्षा वैज्ञानिक रविवार को अग्नि-3 के सफल परीक्षण के गवाह बने। इनमें सारस्वत और रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार तथा अग्नि-3 कार्यक्रम के निदेशक अविनाश चंद्र शामिल थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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