अजमेर शरीफ की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ की मांग (लीड-1)
आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर बुलाए गए मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में शिरकत करते हुए गहलोत ने कहा, "अजमेर शरीफ की सुरक्षा के लिए राज्य ने अपने संसाधनों से पुलिस बल नियोजित किया है, लेकिन पर्यटकों एवं सभी समुदायों के जायरीनों की भारी संख्या को देखते हुए तथा वर्ष 2007 में इस दरगाह पर हुए आतंकवादी हमले की पृष्ठभूमि में, दरगाह शरीफ की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ जैसी संस्था को देने पर विचार किया जाना बहुत जरूरी है। इस सम्बंध में राज्य सरकार का प्रस्ताव केन्द्र के समक्ष विचाराधीन है।"
मुख्यमंत्री ने राज्य में पूर्व में हुए कुछ आतंकवादी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि राजस्थान में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भ्रमण के लिए आते हैं और वर्ष 2007 में अजमेर शरीफ और वर्ष 2008 में जयपुर में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोट की घटनाओं को हम भूल नहीं सकते।
राजस्थान की विशेष परिस्थितियों की चर्चा करते हुए गहलोत ने बताया कि भौगोलिक दृष्टि से देश के सबसे बड़े इस प्रान्त को पाकिस्तान से लगती 1040 किमी की लम्बी सीमा रेखा 'आन्तरिक-सुरक्षा' की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से आतंकवादियों की घुसपैठ एवं हथियारों, मादक द्रव्यों और जाली मुद्रा आदि की तस्करी की संभावना हमेशा बनी रहती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 'राजस्थान इण्डस्ट्रियल सिक्युरिटी फोर्स' के गठन पर भी विचार किया जा रहा है। इसी प्रकार इन्टेलीजेन्स सेवाओं के सुदृढीकरण के लिए 'राज्य विशेष शाखा' का एक पृथक कैडर बनाए जाने के प्रस्ताव का परीक्षण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राजस्थान में संवेदनशील स्थानों एवं आईकॉनिक स्थलों की सुरक्षा के लिए राजस्थान संवेदनशील प्रतिष्ठान सुरक्षा (विनियमन) अधिनियम बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और राज्य सरकार द्वारा इस सम्बंध में कार्य पालिकीय आदेश जारी किए जा चुके है। अजमेर की दरगाह शरीफ और राजसंमद जिले में श्री नाथ द्वारा मन्दिर की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गये हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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