लंदन ने मुंबई और दिल्ली में बंद किए व्यापार कार्यालय
लंदन, 7 फरवरी (आईएएनएस)। लंदन के मेयर पर आरोप है कि उन्होंने 'पिछले दरवाजे' से नई दिल्ली और मुंबई स्थित अपने व्यापार कार्यालय बंद कर दिए।
ब्रिटेन के कंजर्वेटिव पार्टी के प्रमुख नेता और मेयर बोरिस जॉनसन ने लंदन की क्षेत्रीय असेंबली को बताया कि नई दिल्ली और मुंबई से लंदन विकास एजेंसी (एलडीए) के प्रतिनिधियों ने पिछले साल इस्तीफा दे दिया था, अभी उनकी जगह नई निुयक्ति नहीं हुई।
लंदन असेंबली में लेबर पार्टी के एक सदस्य मुराद कुरैशी के सवाल के जवाब में जॉनसन ने बताया कि एलडीए प्रतिनिधियों ने 2009 के शुरू में दिल्ली छोड़ दिया था। इसके बाद मुंबई कार्यालय से ही काम देखा जा रहा था, लेकिन बाद में प्रतिनिधियों ने मुंबई भी छोड़ दिया।
उन्होंने कहा कि एलडीए इस मुद्दे को सुलझाने के रास्ते खोज रही है। इस समय भारत में एलडीए का रजिस्ट्रेशन तो है, लेकिन नई दिल्ली और मुंबई दोनों जगह के कार्यालय बंद हो चुके हैं।
मेयर के बयान की आलोचना करते हुए कुरैशी ने इसे लागत में कटौती करने के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया।
कुरैशी ने आईएएनएस से कहा कि लंदन के लोगों को बिना जानकारी दिए 'पिछले दरवाजे' से नई दिल्ली और मुंबई के कार्यालयों को बंद कर देना बेहद शर्मनाक है।
लंदन में भारत के मालिकाना हक वाले कारोबारों से 14.4 अरब पाउंड से ज्यादा की आय होती है, जो यहां की अर्थव्यवस्था का 5 फीसदी है।
यहां तक कि 2008-09 के दौरान वैश्विक वित्तीय संकट के बीच में 14 भारतीय कंपनियों ने या तो अपना विस्तार किया या नई स्थापना की। इसके अलावा भारत पहले ही लंदन में दूसरा बड़ा निवेशक है।
जॉनसन ने हालांकि कहा है कि वे भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्व को समझते हैं और भारत के साथ अच्छे संबंध जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
जॉनसन पर आरोप है कि उन्होंने लागत में कटौती के तहत एक लाख पाउंड बचाने के लिए वेनेजुएला, मास्को और भारत में एलडीए के कार्यालय बंद कर दिए।
उधर, लंदन वाणिज्य एवं उद्योग चैंबर ने कहा है कि यह एक अदूरदर्शी निर्णय है, जिससे क्षमतावान निवेशकों और आयातकों को गलत संदेश जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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