पाकिस्तान की काली ताकतों को मुंहतोड़ जवाब देंगे : चिदंबरम (लीड-1)
आतंरिक सुरक्षा पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए चिदम्बरम ने कहा, "इस वर्ष की शुरुआत से ही सीमापार से घुसपैठ के मामलों में वृद्धि आई है। अब तक 16 आतंकवादियों को ऐसे प्रयासों के दौरान मारा जा चुका है जबकि 16 अन्य को गिरफ्तार किया गया है।"
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में गुरुवार को प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संबद्ध जमात-उद-दावा द्वारा आयोजित रैली का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि ये संगठन भारत विरोधी हैं। इस रैली में हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना ने हिस्सा लिया था।
चिदंबरम ने कहा, "मैं आपका ध्यान गत चार फरवरी को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हुई आतंकवादी गुटों की बैठक की ओर दिलाना चाहता हूं, जिसमें लश्कर-ए तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन ने हिस्सा लिया। यह स्पष्ट है कि ये गुट भारत-विरोधी हैं और जम्मू एवं कश्मीर पर कब्जा चाहते हैं..ये काली ताकतें कभी कामयाब न होंगी। जब इनसे सामना होगा तो हम उनका मुंहतोड़ जवाब देंगे।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी सम्मेलन पर इस बात पर जोर दिया कि सीमा पार प्रभावी आतंकवादी संगठन देश में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की कोशिश में हैं। उन्होंने कहा कि इन संगठनों की गतिविधियों का खामियाजा जम्मू एवं कश्मीर को भुगतना पड़ रहा है।
नक्सलवाद को गंभीर खतरा करार देते हुए चिदम्बरम ने कहा, "नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सलाह मश्विरे के बाद हमने इसका कड़ाई से मुकाबला करने का फैसला किया है। नक्सली हमले में मारे गए लोगों की संख्या में वर्ष 2009 में इजाफा हुआ है और हो सकता है कि 2010 में भी यह संख्या बढ़े, लेकिन हमारे सुरक्षाबल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि प्रभावित राज्य सरकारें इन क्षेत्रों में अपना शासन स्थापित करेंगी।"
चिदंबरम ने यह जिक्र भी किया कि गत 14 महीनों में देश में कोई बड़ा आतंकवादी हमला नहीं हुआ है। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि हम ढिलाई बरतें। "हमें तत्पर रहने की जरूरत है। हमें अपनी क्षमता बढ़ाने के कार्यो को जारी रखना चाहिए। आतंकवादी खतरों से निपटने और साम्प्रदायिक माहौल को बिगाड़ने के किसी भी प्रयास से बचने के लिए प्रशासन और संबंधित संस्थानों में सुधार की प्रक्रिया हमें जारी रखनी चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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