जलवायु परिवर्तन प्रावधानों में समानता पर स्पष्टीकरण चाहता है भारत
अमेरिका, ब्राजील, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ भारत ने गैर बाध्यकारी कोपेनहेगन समझौते को तैयार किया था। इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र का अगला सम्मेलन मेक्सिको के कानकुन में दिसम्बर में होना है।
रमेश ने 10वें दिल्ली स्थाई विकास सम्मेलन में कहा, "यदि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उत्सर्जन प्रावधानों में समानता कैसे है, तो हम विकासशील देशों के साथ इस पर राजी नहीं होंगे।"
उन्होंने कहा, "यह मुद्दा ऐतिहासिक जिम्मेदारी का है। यह परिभाषित है कि पिछले 200 वर्षो में उत्सर्जन करने वाले मुख्य दोषी हैं। परंतु हम उत्सर्जन की मात्रा नहीं निर्धारित कर सके हैं।"
रमेश ने कहा कि जो देश पहले सबसे बड़े उत्सर्जक रहे हैं, वे भविष्य में भी सबसे बड़े उत्सर्जक नहीं बने रह सकते।
रमेश ने कहा कि यदि कोई कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता होता है तो वह समान और भिन्न जिम्मेदारी पर आधारित होना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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