बाटला हाउस मुठभेड़ को फर्जी नहीं कहा : दिग्विजय सिंह (लीड-2)

और भाजपा के आक्रामक तेवरों के बाद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने कभी भी इस मुठभेड़ को फर्जी नहीं बताया।

सिंह ने लखनऊ में संवाददाताओं से कहा, "मैं इस मामले की जांच नहीं कर रहा हूं। सही-गलत का फैसला मैं नहीं कर सकता क्योंकि मैं कोई जांच एजेंसी नहीं हूं। यह सही है कि इस मुठभेड़ में मारे गए एक लड़के के सिर में गोलियां लगी थी। आम तौर पर मुठभेड़ में ऐसा संभव नहीं लगता।"

उन्होंने कहा, "इस घटना के बाद मैं कांग्रेस के दूसरे कई वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रधानमंत्री से जाकर मिला था। प्रधानमंत्री द्वारा इस मामले की जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपी गई थी, लेकिन जिन लोगों ने शिकायत की, उन लोगों को आयोग ने नहीं बुलाया।"

कांग्रेस महासचिव ने कहा, "मैं कहने की स्थिति में नहीं हूं कि यह मुठभेड़ सही थी या गलत।"

उधर, प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने उनके बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने नई दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि यह वोट बैंक की राजनीति का सबसे घटिया नमूना है।

दिग्विजय सिंह के इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) से जुड़े सदस्यों के परिवारवालों से मिलने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रसाद ने कहा कि यदि कांग्रेस के नेता यह सोचते हैं कि आतंकियों के परिवारों से मिलकर वे मुस्लिम वोट बैंक को अपनी ओर खींच लेंगे, तो यह असंभव है।

भाजपा प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने कहा, "यह वोट बैंक की राजनीति का सबसे घटिया नमूना है, जबकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अपनी जांच में बाटला हाउस मुठभेड़ पर लगे आरोपों को निराधार बता चुका है। इसके अलावा दिल्ली उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने मामले की न्यायिक जांच कराने की जनहित याचिका खारिज कर दी थी।"

उन्होंने कहा कि इस मुठभेड़ में मारे गए दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को सरकार ने अशोक चक्र से सम्मानित किया है, जबकि दिग्विजय सिंह अब इस मुठभेड़ पर ही प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं।

प्रसाद ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।

उल्लेखनीय है कि दिग्विजय सिंह, सितंबर 2008 में बाटला हाउस मुठभेड़ में मारे गए आतिफ और छोटा साजिद के परिवार वालों से मिलने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में उनके गांव संजरपुर गए थे।

साजिद के परिवारवालों ने तो उनसे मुलाकात की थी लेकिन आतिफ के परिवारवालों ने यह कहते हुए मिलने से इंकार कर दिया था कि पहले इस मामले की न्यायिक जांच हो।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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