सपा में खत्म हुई 'अमर कथा' (राउंडअप)
पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अमर सिंह के साथ-साथ रामपुर से पार्टी की सांसद जया प्रदा को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया तथा चार विधायकों अशोक चंदेल, संदीप अग्रवाल, मदन चौहान और सर्वेश सिंह को निलंबित कर दिया गया। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं महासचिव मोहन सिंह ने लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में मंगलवार को यह घोषणा की।
पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की अध्यक्षता में आयोजित संसदीय बोर्ड की बैठक में यह फैसला किया गया। अमर सिंह ने गत छह जनवरी को शारीरिक अस्वस्थता का हवाला देते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। जया प्रदा ने पिछले दिनों एक संवाददाता सम्मेलन में अमर सिंह का खुलकर पक्ष लिया था। इस दौरान उनके साथ ये चारों विधायक भी मौजूद थे।
अमर की राज्यसभा और जया की लोकसभा सदस्यता खत्म करने के लिए पार्टी कानूनी सलाह ले रही है। कानूनी परामर्श लेने के बाद लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के समक्ष वह इस संबंध में आवेदन करेगी।
मोहन सिंह ने कहा, "इन दोनों नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था और इनकी गतिविधियों से पार्टी की एकता को खतरा पैदा हो गया था। अमर ने पार्टी के समानांतर एक संगठन खड़ा कर लिया है। वह पार्टी की नीतियों के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं और पिछले कुछ समय से जाति पकड़ो का अभियान चला रहे हैं जबकि सपा जाति तोड़ो की बात करती है। इसके जरिए पार्टी में फूट डालने की साजिश रची गई। पार्टी में यह रोग तेजी से न फैले इसलिए पार्टी ने सर्जरी का फैसला किया।"
उन्होंने कहा कि जया प्रदा जान बूझाकर लगातार पार्टी के खिलाफ बयानबाजी कर रही थीं। उन्होंने कल्याण सिंह की तारीफ की। ये समाजवादी आंदोलन को खत्म करने के लिए पूंजीवाद-साम्प्रदायवाद की साजिश थी, जिसे विफल करने के लिए पार्टी को यह फैसला लेना पड़ा।
जया बच्चन के बारे में मोहन सिंह ने कहा, "वह एक शालीन और सभ्य महिला हैं। मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं। उन्होंने अभी तक सपा नेतृत्व के खिलाफ कुछ नहीं बोला है।" इस अमर सिंह ने अपनी प्रतिक्रया में कहा कि पार्टी में अगर हिम्मत है तो कार्रवाई करके दिखाए। उधर जया बच्चन ने एक टेलीविजन चैनल से बातचीत में कहा कि राजनीति में इस तरह की बातें होती रहती है लेकिन जब निजी रिश्ते प्रभावित होते हैं तो दुख होता है। उन्होंने कहा कि मैं मुलायम और अमर को फिर से एक साथ देखना चाहती हूं लेकिन इसके लिए पहल उन्हें ही (मुलायम सिंह) करनी पड़ेगी।
पूर्व महासचिव संजय दत्त के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "वह लखनऊ में सपा का प्रचार करते हैं और मुंबई जाकर कांग्रेस को वोट देते हैं। पार्टी ऐसे लोगों का संज्ञान नहीं लेती।"
पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष अबू असीम आजमी से जुड़े एक सवाल पर मोहन सिंह ने कहा, "उन्होंने खुले रूप में पार्टी के साथ रहने की घोषणा की है।" उन्होंने पार्टी के पूर्व महासचिव आजम खान की वापसी का संकेत देते हुए कहा कि वह सपा के सच्चे हमदर्द हैं और उनकी वापसी पर विचार किया जा सकता है।
सपा से निष्कासित किए जाने की घोषणा किए जाने के चंद घंटों के अंदर ही नई दिल्ली में अपने आवास पर एक संवाददाता सम्मेलन में अमर ने कहा, "अब मैं अपनी तरह से काम करने को आजाद हूं.....मैं पार्टी में रहूं या ना रहूं लेकिन आज भी मुलायम सिंह का सम्मान करता हूं। आज के बाद अब मैं सपा के बारे में कुछ भी नहीं कहूंगा। यह निष्कासन मेरे लिए आशीर्वाद जैसा है।"
उन्होंने कहा, "सपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में अंग्रेजी और कम्प्यूटर का विरोध किया था। पार्टी में रहते हुए इसका विरोध करने में मुझे घुटन महसूस हो रही थी। कहा जाता है कि पार्टी का पूंजीवाद हो गया है। इसे समझने में पार्टी को 14 साल लग गए। मुलायम सिंह जब मुख्यमंत्री थे तब उत्तर प्रदेश विकास निगम का गठन किया गया था, जिसके कि अनिल अम्बानी सहित कई प्रमुख उद्योगपति सदस्य थे।"
उन्होंने कहा, "सोमवार को सपा के वरिष्ठ नेता रशीद मसूद ने मुझसे पूछा था कि क्या अभी भी मेरी पार्टी में लौटने की संभावनाएं हैं। इसके जवाब में मैंने साफ-साफ ना कह दिया था। क्योंकि मेरे ऊपर जो आरोप लगाए गए थे कि कल्याण सिंह को साथ लाने के लिए मैं जिम्मेदार हूं और फिर मेरे पास मुलायम की कोई सीडी है, उनसे मैं दुखी था।"
अपने ऊपर पार्टी की ओर से लगाए गए तमाम आरोपों को खारिज करते हुए अमर ने कहा, "मैने शारीरिक अस्वस्थता के चलते छुट्टी मांगी थी लेकिन इसके बदले में मुझे पार्टी से निकाला गया। मुझ पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया जबकि मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। मैंने उत्तर प्रदेश के बंटवारे की जो बात कही थी, वह मेरा सुझाव था। मैंने क्षत्रिय सम्मेलन किया लेकिन उसमें अन्य और पिछड़ी जातियों के लोग भी थे।"
मुलायम के खिलाफ टिप्पणी न करने की बात करने वाले अमर ने इशारों ही इशारों में अपना संकेत भी दे दिया। उन्होंने कहा, "परिवारवाद, जातिवाद और तानाशाही से पार्टी नहीं चल सकती।"
मोहन सिंह पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "लोकसभा चुनाव हारने के बाद अब वह राज्यसभा की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। उनकी यह कामना पूरी होती है तो उनको मेरी सद्भावना है।"
भविष्य की राजनीति के बारे में भी अमर ने स्पष्ट किया, "किसी भी राजनीतिक दल या फिर उसके नेता से मेरी इस सिलसिले में कोई बात नहीं हुई है। मैं फिलहाल लोक मंच के माध्यम से अपना काम करता रहूंगा।"
कांग्रेस में अमर सिंह को शामिल किए जाने के सवाल पर पार्टी के वरिष्ठ नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा, " भारतीय राजनीति में अमर सिंह की कोई भूमिका थी ही नहीं, भविष्य की राजनीति में भी मैं उनकी कोई भूमिका नहीं देखता।"
राष्ट्रवादी कांग्रेस के महासचिव तारिक अनवर ने कहा कि यह समाजवादी पार्टी का अंदरूनी मामला है। हमारे पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।
आज के बाद पार्टी के खिलाफ टिप्पणी न करने की बात कहते हुए सिंह ने लगभग एक महीने से चली आ रही अमर कथा का अंत भी अपनी चिरपरिचित शैली में यह कहकर किया-"तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय, न तुम हारे न हम हारे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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