रामनिवास मिर्धा का निधन, नागौर में होगा अंतिम संस्कार (लीड-1)

प्रधानमंत्री, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। कुछ दिन पहले गहलोत उनका हाल जानने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी गुरुवार को मिर्धा से मिलने के लिए अस्पताल गए थे।

प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामनिवास मिर्धा के निधन पर कहा कि मिर्धा ने सार्वजनिक जीवन के हर क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।

प्रधानमंत्री ने मिर्धा के पुत्र हरेंदर मिर्धा को भेजे शोक संदेश में कहा, "मिर्धा कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में से एक थे। वह छह दशक तक राजनीतिक जीवन में सक्रिय रहे और इस दौरान उन्होंने अपने गृह प्रदेश राजस्थान के साथ ही देश की सेवा की।"

राजस्थान में जाट राजनीति में मिर्धा एक विशिष्ट स्थान रखते थे। 1953 में राज्य सेवा से इस्तीफा देकर राजनीति में आए रामनिवास मिर्धा कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में वर्षो तक विभिन्न मंत्रालयों में वे मंत्री रहे।

उनका जन्म नागौर जिले के कुचेरा ग्राम में तत्कालीन जोधपुर रियासत के पुलिस महानिरीक्षक बलदेवराम मिर्धा के यहां हुआ। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एम.ए. तथा लखनऊ विश्वविद्यालय से विधि स्नातक किया। मिर्धा ने कुछ दिनों तक जेनेवा में भी अध्ययन किया।

मिर्धा 1953 में राज्य सेवा से इस्तीफा देकर जायल क्षेत्र से उपचुनाव में कांग्रेस टिकट पर विधायक चुने गए। वह 13 नवम्बर 1954 से मार्च 1957 तक मोहनलाल सुखाड़िया मंत्रिमंडल में कृषि, सिंचाई और परिवहन आदि विभागों में मंत्री रहे। 1957 के चुनाव में वह लाडनूं और 1962 में नागौर से फिर विधायक चुने गए।

मिर्धा लगातार 25 मार्च 1957 से 2 मई 1967 तक राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष रहे। 1970 में पहली बार इंदिरा गांधी की सरकार में गृह राज्यमंत्री नियुक्त हुए और बाद में 1977 तक नागरिक आपूर्ति एवं पुनर्वास राज्यमंत्री रहे। वह 1977 से 80 तक राज्यसभा के उपसभापति रहे।

मिर्धा ने 1983 में सिंचाई राज्यमंत्री और 1984 में विदेश राज्यमंत्री का पद ग्रहण किया। राजीव गांधी सरकार में उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में वस्त्र मंत्रालय का भी कार्यभार संभाला। दिसंबर 1984 में मिर्धा ने पहली बार नागौर से लोकसभा चुनाव लड़ा और नाथूराम मिर्धा को पराजित किया। उसके बाद वह 1991 के मध्यावधि चुनाव में बाड़मेर लोकसभा क्षेत्र से भी चुने गए। मिर्धा कई सालों तक राजस्थान ललित कला अकादमी के अध्यक्ष भी रहे। उनके छोटे बेटे हरेन्द्र मिर्धा भी पिछली अशोक गहलोत सरकार में मंत्री थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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