मो. हनीफ खान शास्त्री को राष्ट्रीय साम्प्रदायिक सौहाद्र्र पुरस्कार
58 वर्षीय डॉ.मोहम्मद हनीफ खान शास्त्री संस्कृत के माने हुए विद्वान हैं, जिन्हें 1991 में महामंत्र गायत्री और सुरा फातिहा का अर्थ प्रयोग एवं महात्म्य की दृष्टि से तुलनात्मक अध्ययन के लिए पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई थी। एक लेखक के रूप में डॉ. शास्त्री की कम से कम आठ पुस्तकें आ चुकी हैं। इन प्रकाशनों में सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं मोहनगीता, गीता और कुरान में सामंजस्य, वेद और कुरान से महामंत्र गायत्री और सुरा फातिहा, वेदों में मानवाधिकार और मेलजोल। इन प्रकाशनों को दोनों वर्गो के शिक्षाविदों और विद्धिजनों द्वारा श्रेष्ठ कृति माना गया है।
सन् 1976 में पंजीकृत मानवाधिकार और समाज कल्याण केंद्र एक सामाजिक संगठन है जो साम्प्रदायिक, मानव अधिकार, बेघर लोगों, महिलाओं, फुटपाथ पर बसर करने वालों और वंचित लोगों तथा जरूरतमंदों के पुनर्वास कल्याण के लिए कार्य करता है। इसके विशिष्ट कार्यकलापों में ईद, होली, दिवाली और क्रिसमस पर आपसी वार्ता का आयोजन करना, साम्प्रदायिक सौहार्द्र रैली, कवि सम्मेलन, मुशायरा आदि का साम्प्रदायिक सौहार्द्र बढ़ाने और राष्ट्रीय एकता के लिए आयोजन करना शामिल है।
राष्ट्रीय साम्प्रदायिक सौहार्द्र पुरस्कारों की स्थापना राष्ट्रीय साम्प्रदायिक सौहार्द्र संस्थान जो भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा साम्प्रदायिक सौहार्द्र बढ़ाने और राष्ट्रीयता के लिए स्थापित एक स्वायत्तशासी संगठन है, के द्वारा 1966 में की गई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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