रुचिका मामले में राठौड़ को अंतरिम जमानत (लीड-2)
न्यायालय ने तीसरे मामले में भी राठौड़ को राहत दी, जिसमें उस पर रुचिका को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा था। न्यायालय ने सीबीआई से कहा कि राठौड़ को गिरफ्तार करने से चार दिन पूर्व उसे नोटिस दिया जाए।
राठौड़ की अंतरिम जमानत पर सुनवाई सीबीआई द्वारा जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट दाखिल किए जाने के उपरांत होगी। तब तक अंतरिम जमानत जारी रहेगी।
न्यायाधीश सबीना ने आत्महत्या के लिए उकसाने संबंधी मामले को खंडपीठ को भेज दिया है। राठौड़ ने इस संबंध में दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने की अपील की है।
राठौड़ की वकील ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले पर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने राठौड़ के पक्ष में फैसला सुनाया था, इसी वजह से उसके खिलाफ दर्ज नए मामले उचित नहीं हैं।
राठौड़ की अंतरिम जमानत पर सुनवाई सीबीआई द्वारा जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट दाखिल किए जाने के उपरांत 15 फरवरी को होगी।
सीबीआई ने न्यायालय से तीन हफ्ते का वक्त मांगा है ताकि वह मामले की जांच पूरी कर सके। न्यायाधीश ने कहा कि सीबीआई अधिक वक्त मांग रही है, इस वजह से राठौड़ को अंतरिम राहत दी गई।
सीबीआई के वकील अनमोल रतन सिद्धू ने कहा, "हमें धारा 306 के तहत जांच को पूरा करने में कम से कम तीन हफ्ते वक्त चाहिए। पुराने मामले की वजह से इसमें वक्त लग रहा है। सीबीआई के अधिकारी पूरा प्रयास कर रहे हैं। राठौड़ प्रभावशाली व्यक्ति है और हमें भय है कि वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। "
गौरतलब है कि 12 अगस्त 1990 को राठौड़ ने 14 वर्षीया रुचिका के साथ दुर्व्यवहार किया था और इसके तीन साल बाद रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी।
सीबीआई की विशेष अदालत ने पिछले दिनों रुचिका मामले में राठौड़ को छह महीने की सजा सुनाई थी लेकिन 10 मिनट के भीतर ही उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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