'प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए और प्रयास कर सकता है भारत'
'इनवेस्टमेंट सिक्युरिटी : एनस्योरिंग कैपिटल फ्लोज' विषय पर बोलते हुए वक्ताओं ने हालांकि इस बात से सहमति जताई कि भारत ने 1990 की शुरुआत से लेकर अब तक निवेश के अनुकूल वातावरण बनाने में काफी प्रगति की है।
चर्चा की शुरुआत करते हुए सत्र के अध्यक्ष वी.श्रीनिवासन ने भारत में अधिक टिकाऊ आर्थिक वातावरण और बेहतर सुरक्षा ढांचा तैयार करने का आह्वान किया। श्रीनिवासन सीआईआई के पूर्व अध्यक्ष और डब्ल्युएस इंडस्ट्रीज (आई) लिमिटेड के चेयरमैन हैं।
श्रीनिवासन ने भारत में अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए अधिक न्यायिक और प्रशासनिक सुधारों पर भी जोर दिया।
देश में अंतर्राष्ट्रीय पूंजी के प्रवाह में हुई बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए योजना राज्यमंत्री वी.नारायणसामी ने कहा कि भारत में हाल की अवधि में आने वाले पूंजी प्रवाह का चकित करने वाला पक्ष यह है कि यह निजी ऋण और शेयरों का प्रवाह है।
नारायणस्वामी ने कहा, "पूंजी खाते पर एफडीआई, पोर्टफोलियो निवेश, विदेशी व्यावसायिक उधारी और अनिवासी जमा पूंजी के रूप आने वाले पूंजी प्रवाहों का वर्चस्व कायम है।"
संयुक्त अरब अमीरात के विदेश व्यापार मंत्रालय में महानिदेशक, अब्दल्लाह अहमद अल सालेह ने कहा कि एशिया दुनिया के नए आर्थिक केंद्र की ओर बढ़ रहा है। इस नए आर्थिक केंद्र में भारत, चीन, ब्राजील और मेक्सिको जैसे तेजी के साथ विकास कर रहे देश शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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