नाइजीरिया में मुस्लिम-ईसाई दंगे

लगभग तीन हज़ार लोग पुलिस की पनाह में पहुँचे हैं. शहर में कर्फ़्यू लगा दिया गया है जोस के आर्चबिशप ने बीबीसी को बताया है कि शहर में सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं जिसके बाद स्थिति में कुछ सुधार देखा गया है. नाइजीरिया के अधिकारियों ने कहा है कि सांप्रदायिक दंगे भड़कने के बाद लगभग 60 लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है.
नाइजीरिया के उप राष्ट्रपति गुडलक जोनाथन ने आदेश दिया है कि जोश शहर में अतिरिक्ता सैन्य बल तैनात किए जाएँ. ग़ौरतलब है कि वर्ष 2008 में मुस्लमानों और ईसाइयों के बीच भड़के दंगों में 200 लोग मारे गए थे जबकि वर्ष 2001 में ऐसे ही दंगों में एक हज़ार लोग मारे गए थे.
रैडक्रॉस के कार्यकर्ता घायलों के इलाज के लिए अपने घरों से नहीं निकल पाए हैं. रविवार को भड़की इस हिंसा में घरों, मस्जिदों और चर्चों को निशाना बनाया गया और कई इमारतों को आग लगा दी गई. मस्जिदों के पदाधिकारियों और मुस्लिम नेताओं ने संवाददाताओं को बताया है कि लोगों को सामूहिक रूप से दफ़नाने की तैयारियाँ की जा रही हैं.
जोस की केंद्रीय मस्जिद के मुखिया बलाराबी दाऊद ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया है कि उन्होंने ख़ुद रविवार से लेकर मंगलवार तक 192 शवों की गिनती की है. मस्जिद के एक अन्य पदाधिकारी मोहम्मद तांकू शिट्टू ने अनेक शव गिने हैं और वे शवों को सामूहिक रूप से दफ़नाने की तैयारियाँ में जुटे हैं. ताँकू शिट्टू ने कहा, "रविवार शाम को हमने 19 शव दफ़नाए थे और कल यानी सोमवार को 52 शवों का संस्कार किया."
दंगों में मारे गए लोगों की संख्या की पुष्टि सटीक रूप से नहीं हो सकी है और अभी ये पता नहीं चला है कि कितने ईसाई और कितने मुसलमान इन दंगों में मारे गए हैं. पर्यवेक्षकों का कहना है कि नाइजीरिया में इस तरह की लड़ाई सांप्रदायिक भावनाओं का नतीजा है, हालाँकि ग़रीबी और ज़मीन जैसे संसाधनों को भी इन दंगों की जड़ समझा जाता है. अभी यह पता नहीं चला है कि ताज़ा दंगे किस वजह से भड़के हैं. कुछ ऐसी ख़बरें भी आई हैं कि शायद फुटबॉल को लेकर झगड़ा शुरू हुआ जिसने बड़े सांप्रदायिक दंगे का रूप ले लिया.












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