चीन ने की कम्प्यूटरों में सेंधमारी की कोशिश (लीड-1)
ब्रिटिश समाचार पत्र 'द एज' को दिए एक साक्षात्कार में नारायणन ने कहा कि 15 दिसम्बर को उनके कार्यालय के कम्प्यूटरों को ठीक उसी दिन निशाना बनाया गया, जिस दिन गूगल सहित अमेरिका की रक्षा, वित्त और तकनीकी कंपनियों पर चीन की ओर से साइबर हमले की खबर आई थी।
उन्होंने कहा, "यह कोई पहला प्रयास नहीं था जब हमारे कम्प्यूटरों में सेंधमारी की कोशिश की गई।" उनके मुताबिक कथित चीनी सेंधमारों ने ट्रोजन वाइरस रहित पीडीएफ अटैचमेंट वाला एक ई-मेल भेजा था।
नारायणन ने कहा कि इस वाइरस की पहचान कर ली गई और अधिकारियों से कहा गया कि वे तब तक अपने कम्प्यूटर चालू न करें जब तक कि इन वाइरसों को खत्म नहीं कर दिया जाता।
उन्होंने कहा, "लोगों का स्पष्ट मानना है कि कम्प्यूटरों में सेंधमारी का प्रयास चीनियों द्वारा किया गया था। इसके स्रोत का पता लगाना कठिन है लेकिन हमारा संदेह यही है।"
इस बीच, विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि वर्ष 2008 के अप्रैल महीने में भी चीन के संदिग्ध कम्प्यूटर विशेषज्ञों ने विदेश मंत्रालय स्थित कम्प्यूटरों में सेंधमारी का प्रयास किया था। इस सेंधमारी की खबर मिलते ही उस वक्त सरकार ने खुफिया अधिकारियों से विश्व भर में स्थित भारतीय दूतावासों व संबंधित कार्यालयों के सुरक्षा तंत्रों की समीक्षा करवाई थी।
गत वर्ष मार्च के महीने में भी ऐसी कोशिशें की गई थी जिन्हें नाकाम कर दिया गया था। इसके बाद से मंत्रालय के कम्प्युटरों की लगातार सुरक्षा समीक्षा की जाती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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