ज्योति बसु नहीं रहे
सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता, कोलकाता
पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता ज्योति बसु का निधन हो गया है. वो 95 साल के थे.
ज्योति बसु पिछले दो हफ़्तों से बीमार थे और पिछले दो दिनों से उनके सभी प्रमुख अंगों ने काम करना बंद कर दिया था.
निधन के समय उनका पूरा परिवार और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के अनेक वरिष्ठ नेता कोलकाता के एएमआर अस्पताल में मौजूद थे. 11 बज कर 47 मिनट पर ज्योति बसु ने अंतिम सांस ली.
उनके निधन की औपचारिक घोषणा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता बिमान बोस ने की.
बिमान बोस ने नम आखों से कहा, "मैं आपको एक बुरी ख़बर देना चाहता हूँ. ज्योतिदा अब हमारे बीच नहीं रहे हैं. वो हमें छोड़ कर चले गए हैं. मेरे पास कहने के लिए और कुछ नहीं है, मैं और कुछ भी नहीं बोल पा रहा. ज्योतिदा नहीं रहे..."
23 साल तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रह चुके ज्योति बसु के निधन के समय केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम भी अस्पताल में मौजूद थे.
पी चिदंबरम ने अस्पताल के बाहर आकर शोक व्यक्त करते हुए कहा, "ज्योति बसु का न रहना एक बहुत बड़ी क्षति है. सिर्फ पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए वो एक महान नेता थे. हम सब को इस खबर से बहुत दुःख पहुंचा है और इस दुःख की घडी़ में हम ज्योति बसु के परिवार, पश्चिम बंगाल की जनता और पूरे भारत के साथ हैं."
राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने ज्योति बसु के निधन पर शोक व्यक्त किया है.
ज्योति बसु के निधन की खबर मिलते ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी शोक जताया है और कहा है की वे एक कद्दावर नेता थे.
भारतीय जनता पार्टी के नेता अरुण जेटली ने ज्योति बसु के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, "ज्योति बसु भारतीय राजनीति के सबसे वरिष्ठतम नेताओं में से एक थे. सबसे अहम बात ये है की विश्वसनीयता में वे बहुत ऊपर थे. भारतीय राजनीति में उनसे सीख लेने को बहुत कुछ है."
ज्योति बसु के निधन की खबर फैलते ही कोलकाता के एएमआर अस्पताल के बाहर लोगों की भीड़ जमा होनी शुरू हो चुकी थी.












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