पाकिस्तानी परमाणु हथियारों की सुरक्षा के लिए विशेष अमेरिकी बल (लीड-1)
टाइम्स ऑनलाइन ने कहा है कि इस विशेषीकृत इकाई के पास परमाणु सामग्रियों को वापस हासिल करने और उसे सुरक्षित करने का अधिकार होगा।
टाइम ऑनलाइन ने कहा है, "यह कदम पाकिस्तानी सेना में अमेरिका के खिलाफ बढ़ रही भावनाओं, पिछले दो वर्षो के दौरान संवेदनशील ठिकानों पर हुए श्रृंखलाबद्ध हमलों और बढ़ते तनावों के कारण पिछले दो सप्ताहों के भीतर अमेरिकी अधिकारियों द्वारा इस्लामाबाद से की गई कई सारी आधिकारिक शिकायतों के बाद उठाया गया है।"
लेकिन जब पाकिस्तान के विदेश विभाग के एक प्रवक्ता का ध्यान इस रिपोर्ट की ओर खींचा गया तो उसने इसे खारिज कर दिया। उसने कहा, "यह किसी की विचित्र शरारत है।"
समाचार एजेंसी ऑनलाइन ने प्रवक्ता द्वारा एक निजी समाचार चैनल को दिए गए एक बयान के हवाले से कहा है कि यह रिपोर्ट पाकिस्तान के खिलाफ एक साजिश का हिस्सा है।
प्रवक्ता ने कहा है, "पाकिस्तान के परमाणु हथियार सुरक्षित हैं और इसे न तो कोई आतंकी हासिल कर सकता है और न कोई अन्य संगठन ही।" प्रवक्ता ने उस सुझाव को भी खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान की रणनीतिक संपत्तियां गलत हाथों में जा सकती हैं।
टाइम्स ऑनलाइन ने सीआईए के एक पूर्व अधिकारी रोल्फ मोवैट्ट-लार्सन के हवाले से कहा है, "पाकिस्तान की स्थिति यह है कि वहां के परमाणु हथियार दुनिया के सबसे खतरनाक चरमपंथियों के साथ घुलमिल गए हैं। इसलिए हमें इस मामले में चिंतित होने का अधिकार है।"
लार्सन ने कहा है, "पाकिस्तान में सेना के उन ठिकानों पर हमले हुए हैं, जहां परमाणु हथियार रखे गए हैं। वहां सैन्य ठिकानों में आतंकियों द्वारा घुसपैठ की गई है और सुरक्षा व्यवस्था तोड़ी गई है।"
ब्रैडफोर्ड युनिवर्सिटी में पाकिस्तानी सुरक्षा अनुसंधान इकाई के निदेशक शौन ग्रेरगरी ने वर्ष 2007 से पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था तोड़ने की हुई कई सारी कोशिशों का रिकॉर्ड तैयार कर रखा है। उन्होंने चेतावनी दी है, "आतंकी दरवाजों पर खड़े हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications