ज्योति बसु के निधन पर देश भर में शोक की लहर (राउंडअप)
कोलकाता के एक निजी अस्पताल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा)के 95 वर्षीय वयोवृद्ध नेता का रविवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था।
पाटील ने पाटील ने अपने शोक संदेश में कहा कि बसु के निधन से देश ने एक वयोवृद्ध एवं महत्वपूर्ण जन नेता खो दिया। उन्होंने कहा, "बसु ने जन नेता, एक कुशल प्रशासक और महत्वपूर्ण राजनेता के रूप में अपनी काबिलियत दर्शाई।"
उन्होंने कहा, "सबसे लंबे समय तक देश के किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री बनने का अभूतपूर्व तमगा उनके नाम है। मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के बाद हाल के दिनों में उन्हें एक वरिष्ठ राजनेता के तौर पर देखा जाता था। देश के कई नेता उनसे सलाह लिया करते थे।"
उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि बसु अपने पीछे एक ऐसा शून्य छोड़ गए हैं जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।
उन्होंने कहा, "ज्योति बसु के निधन से मुझे गहरा झटका लगा है। उनके निधन से उनके साथी व प्रशंसक बेहद दुखी हैं।"
उन्होंने कहा कि बसु ने सार्वजनिक जीवन तथा पश्चिम बंगाल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने शोक संदेश बसु को ऐसा निष्ठावान व सबकी सहमति से चलने वाला नेता बताया, जिनसे वह अक्सर सलाह लिया करते थे।
बसु के बेटे चंदन बसु को भेजे संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल के इस पूर्व मुख्यमंत्री के निधन से भारतीय राजनीति के एक युग का अंत हो गया।
प्रधानमंत्री ने कहा, "पश्चिम बंगाल में 20 से अधिक वर्षो तक के अपने शासन के दौरान उन्होंने खुद को स्वतंत्र भारत के सबसे कुशल प्रशासक और राजनेता के तौर पर स्थापित किया।"
"वह राष्ट्रीय स्तर पर बहुत ही शक्तिशाली क्षेत्रीय आवाज थे। उन्होंने हमारे संघीय ढांचे को मजबूती प्रदान की।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "व्यक्तिगत रूप से मेरा उनसे लंबा संबंध रहा है। अपने करियर के दौरान अक्सर मैं उनसे पश्चिम बंगाल से संबंधित या फिर राष्ट्रीय महत्व से जुड़े सभी मुद्दों पर सलाह लिया करता था।"
उन्होंने कहा, "उनकी सलाह हमेशा किसी राजनेता की तरह होती थी लेकिन वह व्यवहारिक होती थी क्योंकि वह मूल्यों पर आधारित होती थी। उनके पूरे राजनीतिक जीवन के दौरान उनमें ये गुण विद्यमान रहे।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "ऐसे महान देशभक्त और इतने बड़े विद्वान के निधन से मुझे निजी क्षति हुई है। उनके निधन पर मैं गहरी संवेदना प्रकट करता हूं।"
उन्होंने कहा, "70 के दशक में अशांत राज्य में राजनीतिक स्थिरता लाने, भू सुधार कार्यक्रमों से ग्रामीण बदलाव करने, लोकतांत्रिक व विकेंद्रीकृत शासन की उनकी शैली के लिए पश्चिम बंगाल की जनता उन्हें हमेशा याद रखेगी।"
माकपा पोलित ब्यूरो की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "ज्योति बसु ऐसे मार्क्सवादी थे जिनका विश्वास कभी भी डगमगाया नहीं। वह ऐसे मार्क्सवादी थे, जो हठी नहीं थे और पार्टी की दिशा तय करने के लिए हमेशा अपने व्यापक अनुभवों से सीख लेते रहे।"
अपने दिवंगत प्रिय कामरेड को याद करते हुए माकपा ने कहा, "हम उनके मकसद और कार्यों को आगे ले जाने का प्रयास करेंगे।"
माकपा के महासचिव प्रकाश करात ने कहा, "ज्योति बसु जैसा फिर कोई नहीं होगा।"
करात ने कहा कि बसु माकपा, वामपंथी आंदोलन और देश के एक महान नेता थे। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया। ज्ञात हो कि वह करात ही थे जिन्होंने बसु को 1996 में देश का प्रधानमंत्री बनने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा, "70 साल के सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक गतिविधियों के बाद वह देश के सबसे प्रसिद्ध वामपंथी नेता बने। वामपंथ के प्रति समर्पित बसु स्वतंत्र भारत के उन नेताओं में थे जिन्होंने लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को वास्तविक मजबूती दी तथा आम आदमी को भारतीय राजनीति के केंद्र में लाने में अहम भूमिका निभाई।"
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी. राजा ने बसु को श्रद्धांजलि देते हुए रविवार को कहा कि वह देश के महान प्रधानमंत्री साबित हो सकते थे।
राजा ने कहा, "बसु ने साबित किया कि वाम दलों का गठबंधन सफलतापूर्वक कार्य कर सकता है और जनता की बहुत सेवा कर सकता है। वह महान प्रधानमंत्री भी साबित हो सकते थे।"
वर्ष 1996 में बसु से बतौर प्रधानमंत्री केंद्र में सरकार का नेतृत्व करने को कहा गया था। लेकिन माकपा ने यह कहकर इस पेशकश को ठुकरा दिया था कि वह किसी ऐसी राष्ट्रीय सरकार का नेतृत्व नहीं करेगी जिसकी नीतियों पर उसका नियंत्रण न हो।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बसु के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मौत से देश की राजनीति के एक अध्याय का समापन हो गया।
अपने शोक संदेश में वाजपेयी ने कहा, "वह एक कुशल प्रशासक थे और कर्मठ राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने लंबे समय तक पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री रहने का रिकार्ड ही नहीं बनाया बल्कि कई दूरदर्शिताभरे कदम भी उठाए।"
वाजपेयी ने कहा, "बसु अपने सिद्धांतों पर जिए और मुख्यमंत्री पद पर आसीन होने के लिए उन्होंने कड़ा परिश्रम किया।"
वाजपेयी ने कहा, "उनके निधन से राजनीति के एक अध्याय का समापन हो गया।"
केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, "उनके निधन से मैंने अपना महान शुभचिंतक, देश ने एक योग्य प्रशासक, संसदीय परंपराओं में आस्था रखने वाले और एक करिशमाई नेता को खो दिया है।"
मुखर्जी ने कहा कि वर्ष 2004 में वामपंथी दलों के बाहरी समर्थन से बनी प्रथम संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के वह वास्तुकार थे।
उन्होंने कहा, "ज्योति बाबू से मेरी निकटता 60 के दशक में हुई जब वह पश्चिम बंगाल में प्रथम यूनाइटेड फ्रंट सरकार के उप मुख्यमंत्री बने।"
रेल मंत्री ममता बनर्जी ने बसु को महान राजनीतिक हस्ती करार देते हुए 72 घंटे का राजकीय शोक घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हम सभी को देश भर में तीन दिन के राजकीय शोक के साथ भारतीय राजनीति की ऐसी महान हस्ती को श्रद्धांजलि देनी चाहिए।"
एएमआरआई अस्पताल के बाहर उन्होंने कहा, "वह भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन का प्रथम एवं अंतिम अध्याय थे।"
उन्होंने कहा, "बसु को देश के वाम आंदोलन में अग्रणी भूमिका के कारण उनकी राजनीतिक उपलब्धियों के लिए हमेशा याद रखा जाएगा।"
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बसु को भारतीय राजनीति का आदर्श बताया है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि ज्योति बाबू भारतीय राजनीति में सबसे लंबे समय तक विद्यमान रहने वाले सबसे विश्वसनीय नेता थे।
उन्होंने कहा, "समकालीन नेताओं में उनका कद सबसे ऊंचा था। वह अपनी विचारधारा के प्रति समर्पित थे और उन्होंने भारतीय राजनीति की सबसे लंबी पारी खेली।"
जेटली ने कहा, "उनकी विश्वसनीयता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता था। हमारी पार्टी उनके निधन पर गहरा व्यक्त करती है। वह उन नेताओं में थे जिनसे हम सभी ने कुछ न कुछ सीखा है।"
उन्होंने कहा, "भारतीय लोकतंत्र की यही सबसे बड़ी मजबूती है कि इसमें अलग-अलग मतों के लिए भी स्थान है। मतभेदों के बावजूद कुछ नेता ऐसे होते हैं जो आपके विरोधी होते हैं लेकिन उनमें कुछ ऐसे गुण होते हैं जो सराहनीय होते हैं। वह भारतीय राजनीति के आदर्श थे। उनका निधन भारतीय राजनीति का बहुत बड़ा नुकसान है।"
बसु को देश के बहुमूल्य सपूतों में से एक करार देते हुए कांग्रेस ने कहा कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में सादगी से जनता की सेवा की।
कांग्रेस के प्रवक्ता शकील अहमद ने कहा कि बसु का निधन सिर्फ पश्चिम बंगाल और माकपा के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए क्षति है।
अहमद ने आईएएनएस से कहा, "निस्संदेह वह भारत के बहुमूल्य सपूत थे। उन्होंने अपना जीवन सादगी से जिया और सार्वजनिक जीवन में सच्चाई का साथ दिया।"
लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि उन्होंने एक बार फिर से अपने पिता समान शख्स को खो दिया है।
चटर्जी ने भावुक स्वर में कहा, "वाम मोर्चे में जब हालात बिगड़ने लगे तो वह उदास थे। मेरे साथ जो हुआ, उससे वह उदास थे। मैं उनसे सभी मसलों पर राय लेता था। मैंने दूसरी बार अपने पिता जैसे किसी शख्स को खो दिया है।"
चटर्जी ने कहा, "वह मुझसे बेहद स्नेह करते थे। मैंने जो कुछ भी हासिल किया, वह उन्हीं की बदौलत है।"
उन्होंने कहा, "पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उनका बहुत आदर करती थीं और उनसे हर मसले पर राय लेती थीं।"
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने कहा कि बसु सभी राजनीतिक दलों के लिए नेता थे और उनका व्यक्तित्व प्रधानमंत्रियों से भी विशाल था।
प्रसाद ने कहा, "वह सिर्फ कम्युनिस्ट पार्टी के ही नेता नहीं थे। वह हम सभी के..सभी राजनीतिक दलों के नेता थे। आपको उनके जैसा नेता नहीं मिलेगा।"
इनके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी, केरल के मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करूणानिधि, जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के. रोसैया सहित देश के तमाम नेताओं ने दिवंगत नेता के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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