आकाश में 'आग का वलय' देखने को तैयार है दिल्ली
कुंडलाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं लेकिन चंद्रमा की छाया सूर्य की परिधि की अपेक्षा छोटी होती है। इस प्रकार चंद्रमा से ढका हुआ सूर्य 'आग के वलय' के रूप में नजर आता है और चंद्रमा की छाया के चारों ओर से सूर्य की किरणें निकलती हुई दिखाई देती हैं।
दिल्ली के नेहरू तारा मंडल के निदेशक एन. रतनश्री का कहना है, "देश के दक्षिणी इलाकों खासकर रामेश्वरम के निकट धनुषकोडी में सूर्य ग्रहण देखने वाले लोग बहुत भाग्यशाली होंगे। वहां 'आग का वलय' सबसे सुंदर और स्पष्ट दिखेगा। धनुषकोडी में 10 मिनट 13 सेकंड तक यह नजारा देखा जा सकेगा।"
दिल्ली में आंशिक सूर्य ग्रहण ही दिखाई देगा। यहां सुबह 11.53 बजे से दोपहर बाद 3.11 बजे तक इसे देखा जा सकेगा। दोपहर 1.39 बजे सबसे अधिक 53 प्रतिशत तक सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा।
राजधानी के विभिन्न स्थानों जैसे नेहरू तारा मंडल में और एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर्स एसोसिएशन ने 15 जनवरी को लोगों को यह अनोखा नजारा दिखाने की व्यवस्था की है।
देश में सुबह 11 बजे के आसपास यह नजारा दिखना शुरू होगा और इसे दोपहर में 3.15 बजे तक देखा जा सकेगा। सूर्य ग्रहण सबसे पहले तमिलनाडु में कन्याकुमारी में दिखेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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