हैकिंग से परेशान गूगल ने दी चीन से बाहर निकलने धमकी (लीड-1)
अमेरिकी समाचार पत्र "द न्यूयार्क टाइम्स" के मुताबिक गूगल ने मंगलवार को जारी एक बयान में इसे अपने कम्प्यूटर तंत्र पर गंभीर साइबर हमला करार दिया है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि इस हमले का उद्गम स्त्रोत संभवत: चीन में है। इस हमले का उद्देश्य चीनी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के जी-मेल अकाउंट को हैक करना था।
गूगल के मुताबिक यह हमला पिछले सप्ताह हुआ। इसके निशाने पर करीब 34 कंपनियां थी, जिसमें अधिकत्तर सिलिकॉन वेली व कैलीफोर्निया की है।
समाचार पत्र ने इस मामले में गूगल की जांच से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से कहा है कि हमलावर कंपनी के अभेद्य सुरक्षा चक्र को तोड़ने और संवेदनशील जानकारी हासिल करने में संभवत: कामयाब हो गए थे। गूगल ने हालांकि इस तरह के किसी भी नुकसान से इंकार किया है।
इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने एक बयान में कहा है, "इस बारे में हमें गूगल से जानकारी मिली है। यह बहुत गंभीर चिंता की बात है। हम चीन सरकार से इस बारे में स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहे हैं। आधुनिक समाज और अर्थव्यवस्था में साइबर स्पेस की दुनिया में विश्वास के साथ संचालन की योग्यता बहुत जरूरी है।"
होनोलुलू में क्लिंटन ने कहा कि इस बारे में वह तथ्यों के पूरी तरह सामने आने के बाद आगे की प्रतिक्रिया देंगी।
वर्ष 2006 में एक समझौते के तहत गूगल ने चीन में कदम रखा था। वह कई प्रतिबंधित विषयों के बारे में चीनी नागरिकों को जानकारी उपलब्ध कराता आ रहा है। चीन में गूगल के करीब 30 करोड़ उपभोक्ता हैं।
अगर गूगल ऐसा कोई कदम उठाती है तो दुनिया की एक सबसे सम्मानित कंपनी द्वारा यह चीन को कड़ी फटकार साबित होगी।
गूगल ने कहा है कि वह अपने उपभोक्ताओं को बिना संशोधित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए एक नए समझौते की कोशिश करेगी, लेकिन ऐसा संभव नहीं दिखता। क्योंकि चीन में इंटरनेट पर दुनिया में सबसे ज्यादा प्रतिबंध है। गूगल ने कहा है कि ऐसा नहीं होने पर वह चीन में अपनी वेबसाइट 'गूगल डॉट सीएन' और अपने कार्यालय को बंद देगी। चीन में कंपनी के करीब 700 कर्मचारी हैं।
गूगल के अधिकारी चीन के बारे में अपनी रणनीति में हुए बदलाव को लेकर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं कर रहे हैं। भारी-भरकम निवेश के बावजूद चीन के बाजार में गूगल की हिस्सेदारी काफी कम है। इसके पीछे मुख्य कारण चीनी सरकार द्वारा खोज के प्रत्येक तीन विषयों में से एक को प्रतिबंधित करना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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