मेरी कलाकृतियां लाहौर से जुड़ी यादों का इजहार करती हैं : खन्ना
नई दिल्ली, 11 जनवरी (आईएएनएस)। भारत के मशहूर समकालीन पेंटर कृशन खन्ना की तूलिका विभाजन से पहले के कालखंड की यात्रा कराती है। अपने कई चित्रों में उन्होंने उस अतीत को जज्ब करने की कोशिश जो उनके अहसास में अभी तक सांस लेता है। वह अपनी कई कलाकृतियों को लाहौर में बिताए अपने बचपन की यादों का आईना मानते हैं।
दिल्ली में रहने वाले इस नामचीन पेंटर ने आईएएनएस के साथ साक्षात्कार में कहा, "मेरी कई पेंटिंग्स में बचपन के जीवंत पल कैद हैं। अपने बचपन की कई यादगार घटनाओं से जुड़ी यादों का इजहार मैंने पेंटिंग के जरिए किया है।"
84 वर्षीय खन्ना की पेंटिंग प्रदर्शनी 23 जनवरी से आयोजित होने जा रही है। इसका आयोजन ललित कला अकादमी में मुंबई स्थित ऑनलाइन गैलरी सैफ्रनआर्ट द्वारा किया जाएगा।
खन्ना ने इस कला प्रदर्शनी के लिए अपने एकरंगा तैल चित्रों के पांच संग्रह पूरे कर लिए हैं। उनका कहना है कि इन चित्रों में लाहौर के मैकलागन रोड में बीते उनके बचपन की यादें कैद हैं।
वह कहते हैं, "विभाजन पूर्व की स्मृतियां आज भी जीवंत बनी हुई हैं। मैंने लाहौर में अपना बचपन ऐसे समाज में बिताया था जिसमें हिंदू, सिख, ईसाई, मुसलमान और पारसी सभी मिलजुलकर रहते थे।"
इस श्रृंखला की शुरुआत एक होम्योपैथिक डाक्टर गुरबक्श राय पर केंद्रित एक पेंटिंग से होती है। इसमें राय को पुलिस गिरफ्तारी के दौरान अपने परिवार वालों से विदा लेते दिखाया गया है।
खन्ना कहते हैं, "मैंने उस घटना को दर्शाने के लिए एक ही रंग का इस्तेमाल इसलिए किया है ताकि वह पूरी तरह मौलिक और यथार्थ दिखे। ज्यादा रंगों के इस्तेमाल से पेंटिंग अपने कथ्य से भटक जाती।"
एक पेंटिंग एक ऐसी महिला को समर्पित है जिन्होंने खन्ना की मां को अंग्रेजी बोलना और पढ़ना सिखाया था। अतीत के एक कोने में झांकते हुए वह कहते हैं, "एक पेंटिंग मैंने अपने चाचा और उनके परिवार से जुड़ी यादों को समर्पित की है। इसमें चाचा को अपने परिवार के साथ पड़ोसी पाकपट्टन शहर जाते हुए दिखाया गया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
**












Click it and Unblock the Notifications