प्रवासी दिवस का हुआ समापन

खाड़ी के देशों में आर्थिक मंदी की वजह से नौकरी से निकाले जा रहे भारतीय श्रमिकों के स्वदेश में पुनर्वास के लिए कोष बनाने की घोषणा की गई है, इनमें ऐसे लोगों की संख्या काफ़ी अधिक है जो नौकरी से निकाले जाने के बाद अपने घर लौटने तक की स्थिति में नहीं है और उन पर भारी कर्ज़ भी है जो उन्होंने विदेश जाने के वास्ते लिया था.
प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री वायलार रवि ने कहा है कि सरकार खाड़ी में काम करने वाले कामगारों की समस्याओं से पूरी तरह वाकिफ़ है और उनकी मदद करने के लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है. सम्मेलन में शामिल होने के लिए खाड़ी देशों से आए प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के बाद विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने कहा, "इन लोगों का भारत और खाड़ी के देशों की अर्थव्यवस्था में भारी योगदान है, सरकार इनकी सकुशल स्वदेश वापसी और इज्ज़त से जीवन दोबारा शुरू करने का अवसर देने के लिए सभी संभव क़दम उठाएगी."
अपने समापन भाषण में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने खाड़ी के भारतीय कामगारों के हिम्मत और लगन की दाद दी. उन्होंने कहा, "मैं सभी भारतीय लोगों की ओर से खाड़ी देशों में काम करने अपने लोगों को सलाम करती हूँ जो अक्सर बहुत कठिन परिस्थितियों में परिवार से दूर रहकर काम करते हैं." खाड़ी के देशों से वर्ष भर में लगभग 20 अरब डॉलर की राशि भारत भेजी गई, यह निजी तौर पर भारत भेजी जाने वाली राशि का 40 प्रतिशत है.
प्रवासी भारतीय दिवस में खाड़ी के मज़दूरों की समस्याओं के अलावा ऑस्ट्रेलिया में भारतीय लोगों पर हमलों का मुद्दा भी ख़ासी चर्चा में रहा, सम्मेलन के दौरान ही इस तरह की हिंसा की घटनाओं के कारण प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री को अपना आश्वासन बार-बार दोहराना पड़ा कि 'भारत सरकार विदेश में बसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बहुत गंभीर है'.
तीन क्षेत्र
'एनगेजिंग विद डायस्पोरा' यानी विदेश में बसे भारतीय लोगों के साथ संवाद शीर्षक के साथ आयोजित इस शीर्ष स्तरीय सम्मेलन में तीन क्षेत्रों पर ख़ास ध्यान दिया गया, ये क्षेत्र हैं, शिक्षा तथा ज्ञान-विज्ञान, निवेश और जनकल्याण.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सम्मेलन का उदघाटन करते हुए कहा कि "इन सभी क्षेत्रों में भारतीय दुनिया भर में सराहनीय कार्य कर रहे हैं वे इस मामले में अपने देश की मदद कर सकते हैं". उन्होंने कहा कि यह रिश्ता 'सहोपकारिता के सिद्धांत' पर आधारित है इससे दोनों पक्षों को लाभ होगा.
इसी सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने एक अहम घोषणा की कि अगले आम चुनाव तक विदेश में रहने वाले भारतीय लोगों को मतदान की सुविधा देने के मामले पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है लेकिन इस योजना को किस तरह लागू किया जाएगा इसके बारे में सम्मलेन का समापन होने तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आ सकी.
प्रवासी भारतीय दिवस के लिए दुनिया के पचास देशों से विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय 1500 प्रतिनिधि आए थे जिन्होंने अनेक परिचर्चाओं में हिस्सा लिया, दिल्ली के विज्ञान भवन में भारी तामझाम के साथ आयोजित इस सम्मेलन में दस से अधिक कैबिनेट मंत्रियों, लगभग इतने ही मुख्यमंत्रियों और अनेक वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया.
परिवहन और सड़क निर्माण मंत्री कमलनाथ ने इनफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड की बात कही तो अनेक राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने विदेश में बसे भारतीय निवेशकों की पूंजी अपने राज्य में आकर्षित करने की जीतोड़ कोशिश की. महाराष्ट्र, गुजरात, केरल, कर्नाटक, उड़ीसा, जम्मू-कश्मीर और बिहार जैसे कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों या वरिष्ठ मंत्रियों ने ज़ोरदार तरीक़े से अपने राज्य को निवेश के बेहतरीन विकल्प बताया, सबसे अधिक भीड़ नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में दिखाई दी.
विज्ञान भवन के खचाखच भरे कई हॉलों में एक साथ अनेक परिचर्चाएँ चल रही थीं जिनमें बड़ी-बड़ी बातें कही जा रही थीं, सिखों के अधिकार के लिए फ्रांस में आंदोलन चला रहे गुरदयाल सिंह ने इस सम्मेलन के परिणाम के बारे में कहा, "हम तो अपने खर्चे पर आए थे, हम ये तो नहीं कह सकते कि हमारा पैसा बर्बाद हुआ लेकिन इस तरह के सम्मेलनों का सिर्फ़ एक ही फायदा होता है कि लोग एक दूसरे से संपर्क कर पाते हैं, बातें कर पाते हैं, यहाँ किसी ठोस नतीजे की उम्मीद नहीं की जा सकती."
सम्मेलन में कई प्रतिनिधि पहली बार भारत आए हैं और वे इस बात से खुश थे कि उन्हें भारत को देखने का अवसर मिला, उनमें से अधिकतर का मानना था कि इस तरह के आयोजन करके भारत सरकार अपने रिश्तों को परदेस में बसे लोगों से बेहतर बना रही है जो सराहनीय है.












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