मौज-मस्ती के और भी ठिकाने हैं

मौज-मस्ती के और भी ठिकाने हैं

नितिन श्रीवास्तव

बीबीसी संवाददाता, तिरुअनंतपुरम

भारत में आने वाले विदेशी सैलानी घूमने-फिरने के लिए अब गोवा नहीं बल्कि केरल के अनेक स्थानों का रुख़ कर रहे हैं.

यही कारण है कि पिछले दो-तीन सालों में केरल के कोल्लम, कोवलम, कुमारकम और कोच्ची जैसी जगहों में विदेशी सैलानियों की दिलचस्पी बढ़ी है.

गोवा के मोहभंग या यूं कहें कि दूसरे स्थानों का रुख़ करना दरअसल जहाँ दूसरे विकल्प का होना है, वहीं गोवा में पिछले कुछ बरसों में सैलानियों की सुरक्षा पर उठे सवाल भी हैं.

गोवा के मनमोहक समुद्री बीच, वहां का एक 'अंग्रेज़ी-पुर्तगाली' माहौल और प्रशासन की तरफ़ से घूमने-फिरने और खाने-पीने की खुली छूट के चलते गोवा कई दशकों तक भारत घूमने आ रहे विदेशियों की पहली पसंद रहा.

क़रीब तीन साल पहले मैं जब गोवा में पंद्रह दिन बिताकर वापस दिल्ली लौटा तो लगा कि विदेशियों के लिए कम से कम भारत में वही सबसे पसंदीदा जगह रहेगी, पर अब चीज़ें बदल चुकी हैं और शायद मेरी राय भी.

नए ठिकाने

केरल में जिस हिसाब से पिछले दो-तीन सालों में विदेशी सैलानी आ रहे हैं उससे तो ये साफ़ हो जाता है कि यहाँ के बीच, बैकवाटर की सैर और यहाँ का प्रसिद्ध आयुर्वेदिक मसाज दुनिया भर में चर्चित होते जा रहे हैं.

पिछले कुछ सालों में गोवा में जिस रफ़्तार से विदेशियों के साथ हो रहे अपराध की दर बढ़ी है उससे ये विदेशी सैलानी थोड़े जागरूक ज़रूर हो गए हैं. चाहे वो स्कारलेट कीलिंग नमक ब्रितानी लड़की की रहस्मयी मौत हो या फिर इसी साल मई महीने में रेल की पटरियों पर मिला एक रूसी लड़की एलेना सुखानोवा का शव ही क्यों न हो, गोवा में विदेशियों के साथ बढ़ रहे आपराधिक मामलों ने इन्हें सोचने पर मजबूर ज़रूर कर दिया है.

सोचा, क्यों न ख़ुद शाम-रात के वक़्त चल कर केरल के कुछ लोकप्रिय समुद्री बीचों का जाएज़ा लिया जाए. कोवलम तट पर रात क़रीब नौ बजे पहुँचने पर आखें चकाचौंध रह गई. कोवलम के सभी तीन बीचों पर सिर्फ विदेशी सैलानी घुमते-फिरते, खाते-पीते और गाते-बजाते दिखे.

हैरानी तब और बढ़ी जब ये पता चला कि इनमे से ज़्यादातर यूरोप से आएं हैं और वो भी ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और रूस से.

चार लोगों का एक ब्रितानी समूह एक 'शैक' में बियर पीते दिखा तो मैंने उनसे बात की. समूह के मुखिया माइकेल ने बताया, "हमें गोवा में चल रही दिक्कतों के बारे में पता है. हम यहाँ क्रिसमस की छुट्टियों के लिए आएं हैं और हम नहीं चाहते थे कि गोवा जा कर किसी भी दिक्कत का सामना करना पड़े. कोवलम लाजवाब जगह है, लोग बहुत अच्छे हैं, खाने बेमिसाल है और सबसे बड़ी बात है की हम यहाँ ज़्यादा सुरक्षित हैं."

कोवलम के हासई बीच पर ही स्थित है होटल सीराक जिसे श्रीकुमार नायर चलते हैं. उनका कहना है कि स्थानीय लोगों को भी कुछ साल पहले ताज्जुब हुआ था जब एकाएक विदेशी सैलानियों की तादाद बढ़ गई.

श्रीकुमार कहते हैं, "केरल से ज़्यादा सुरक्षित जगह भारत में शायद ही हो. यहाँ आने वाले विदेशी पर्यटक रात दो बजे तक बीच पर गाते-बजाते हैं और इन्हें किसी भी चीज़ की फ़िक्र नहीं है. सभी पर्यटक कहते हैं कि गोवा अब उतना सुरक्षित नहीं रह गया है, क्योंकि वहां अपराध बढ़ चुका है."

श्रीकुमार के होटल में अच्छी 'पोम्फ्रे' मछली का लुत्फ़ उठाने के बाद मैं ख़ुद बीच पर घूमने लगा जहां मेरी मुलाक़ात 45 वर्षीय ब्रितानी महिला मारथा से हुई.

खुली छूट है

मारथा कहती हैं," मैं ऐसे कई ब्रितानी लोगों को जानती हूँ जो पिछले साल तक गोवा ही छुट्टी मनाने आते थे. जगह सस्ती थी, रोक-टोक का माहौल नहीं था और लोग आपका स्वागत करते थे. पर अब नहीं. अब तो हर कोई विदेशियों को भी शक की नज़र से देखता है. कोवलम या कोच्ची में ऐसा नहीं है और हमारे ऊपर प्रशासन की भी कोई पाबंदी नहीं."

मारथा की बात में सच्चाई दिखी क्योंकि यहाँ आने वाले विदेशी सैलानी अपने छोटे-छोटे बच्चों को भी पूरे इलाक़े में घूमने के लिए अकेले छोड़ देते हैं और उन्हें इनके सुरक्षित रहने का विश्वास भी है.

केरल में करीब चार दिन बिताने के बाद राजधानी तिरुअनंतपुरम से लेकर कोल्लम और कोवलम के समुद्री तटों तक मुझे हर जगह विदेशी सैलानियों का सैलाब ही देखने को मिला है.

ज़्यादातर को इस बात का अंदाजा है कि हाल-फ़िलहाल में गोवा में कौन-कौन सी घटनाएं हुईं हैं और सरकार की तरफ़ से कैसे बयान आते रहे हैं.

कोवलम में मेरी मुलाक़ात एक रूसी सैलानी अन्द्रिया से हुई जिन्होंने संक्षेप में पूरी तस्वीर साफ़ कर दी. अन्द्रिया ने बताया,"केरल आज की तारीख़ में ठीक वैसा है जैसे आज से दस साल पहले गोवा था. मैं आज केरल में उतना ही सुरक्षित महसूस करता हूँ जितना मैं गोवा में आज से 10 साल पहले किया करता था. इसीलिए मेरा परिवार अब गोवा नहीं केरल आने लगा है."

अगर आपने भी अभी तक 'इश्वर के इस देश-केरल' को नहीं देखा है तो मेरी राय पर आएं और देखे कि प्रकृति की इस अनूठी देन को यहाँ के लोग काफ़ी संभालकर रख रहे हैं. ख़ासतौर इसलिए भी क्योंकि उन्हें पता है की जब पर्यटक और वो भी विदेशी पर्यटक केरल को अपना गंतव्य बनाएंगे तो इस इलाक़े में ख़ुशहाली और ज़्यादा नज़र आएगी.

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