चीन से भारत को कोई खतरा नहीं: कृष्णा

चीन पर दो किताबों को जारी करने के अवसर पर कृष्णा ने कहा, "मुझे दोहराने दें कि भारत सरकार चीन या चीन के विकास को एक खतरे के रूप में नहीं देखती।" उन्होंने कहा, "हम स्वीकार करते हैं कि कभी-कभी सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों एक साथ होते हैं क्योंकि भारत और चीन जैसे दो विशाल और विविधता वाले देशों के हितों का पूरी तरह मिलना संभव नहीं है।"
किसी विरोध को गलत नहीं समझें
कृष्णा ने कहा कि ऐसी प्रतिस्पर्धा या सहयोग के अभाव को गलत या विरोध नहीं समझना चाहिए। पुस्तक विमोचन समारोह का आयोजन थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन ने किया था।
भारत और चीन का हित एक दूसरे की समृद्धि में होने पर जोर देते हुए कृष्णा ने कहा कि दोनों देशों के मतभेदों को वार्ता और राजनय के माध्यम से सुलझाना चाहिए। चीन की ओर से समय-समय पर होने वाली घुसपैठों के बारे में पूछे गए एक सवाल पर कृष्णा ने इसके लिए दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कायम मतभेद को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा, "चीन के साथ हमारी लंबी सीमा है, जिसका सीमांकन नहीं हुआ है। हम एक सौहाद्र्रपूर्ण समझौते के इच्छुक हैं।" भारत और चीन दशकों पुराने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए 13 दौर की वार्ता कर चुके हैं लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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