शिवराज ने की चुनाव प्रक्रिया में बदलाव की वकालत
चौहान ने इसके लिए सांसदों, विधायकों, विभिन्न राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के नेताओं और पत्रकारों को पत्र लिखकर आम सहमति बनाने की पहल की है।
चौहान ने अपने पत्र के माध्यम से कहा है कि चुनाव से लोकतंत्र मजबूत और समृद्घ हुआ है। 1970 तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ-साथ होते रहे हैं। इसके बाद जहां विधानसभा और लोकसभा के चुनाव अलग-अलग होने लगे वहीं मध्यावधि चुनाव की स्थितियां भी बनने लगीं।
पत्र में आगे कहा गया है कि अलग -अलग चुनाव से खर्च दोगुना हो जाता है, वहीं धन बल को भी बढ़ावा मिलता है। इतना ही नहीं आचार संहिता लागू होने के कारण विकास कार्य प्रभावित होते हैं। इसके अलावा कभी-कभी खंडित जनादेश ने मजबूरी के मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री को भी जन्म दिया है, जिसके परिणाम देश को भुगतना पड़े हैं।
चौहान ने अपने पत्र में चुनाव प्रक्रिया में सुधार के लिए सुझाव दिया है कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होना चाहिए और साथ ही इनका कार्यकाल खंडित न होकर पांच साल होना चाहिए। उन्होंने पत्र में कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का चुनाव सीधे मतदाताओं से कराने के अलावा मान्यता प्राप्त दलों के चुनाव खर्च के लिए स्टेट फंडिंग की जानी चाहिए। चौहान ने चुनाव सुधारों के प्रति आम सहमति बनाने के साथ सभी वर्गों से सहयोग मांगा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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