फर्जी मुठभेड़ मामले में 8 और पुलिसकर्मियों को उम्रकैद
अभियोजन पक्ष के वकील विकास शाक्य ने बुधवार को संवाददाताओं को बताया कि अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले आठों पुलिसकर्मियों को मंगलवार को सोनभद्र की त्वरित अदालत के अपर सत्र न्यायाधीश अवनीश कुमार द्विवेदी ने उम्रकैद की सजा सुनाई। इससे पहले अदालत ने सोमवार को एक उपनिरीक्षक सहित पांच पुलिसकर्मियों के लिए भी यही सजा मुकर्रर की थी।
इस मामले में कुल दो उप निरीक्षकों सहित 16 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया था जिनमें से 13 को सजा सुनाई जा चुकी है। दो पुलिसकर्मी कभी भी अदालत के समक्ष पेश नहीं हुए और उन्हें पहले ही भगौड़ा घोषित किया जा चुका है। एक अन्य उपनिरीक्षक ने मंगलवार को अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं किया।
यह मामला दो सितंबर, 2003 का है। सोनभद्र रेलवे स्टेशन से बीएससी के छात्र प्रभात कुमार श्रीवास्तव और उसके दोस्त रमाशंकर साहू को शातिर बदमाश बताकर जिले के पिपरी थाने के पुलिसकर्मी रनटोला के जंगल में ले गए और वहां फर्जी मुठभेड़ में मार डाला। बाद में हुई आधिकारिक जांच में मुठभेड़ को संदिग्ध पाया गया और इस वजह यह मामला आपराधिक जांच विभाग की अपराध शाखा (सीबीसीआईडी) को स्थानांतरित कर दिया गया।
सीबीसीआईडी ने जांच के बाद 2006 में 16 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आरोप पत्र दाखिल किया। फर्जी मुठभेड़ में मारे गए दोनों छात्र झ्झारखण्ड के गढ़वा जिले के निवासी थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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