अस्पताल को देना होगा 18 लाख रुपये मुआवजा
जिला उपभोक्ता फोरम ने विवाद का निपटारा करते हुए यहां सेक्टर चार में स्थित इंस्कॉल अस्पताल को मनीमाजरा कस्बे के नजदीक रहने वाली इंद्रजीत अरोड़ा को हर्जाना देने के लिए कहा है।
गौरतलब है कि मधुमेह से पीड़ित अरोड़ा को एक अगस्त 2005 को ठंड के साथ बुखार और पैर में दर्द की शिकायत होने पर इंस्कॉल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अरोड़ा ने अस्पताल के चिकित्सकों पर आरोप लगाया कि उन्होंने बिना किसी वरिष्ठ चिकित्सक की परामर्श के ही गलत इंजेक्शन दे दिया था।
अरोड़ा की शिकायत थी कि इंजेक्शन लगाने के बाद उनकी हालत बिगड़ती गई। बाद में उन्हें दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इंजेक्शन की कीमत 72,000 रुपये थी।
अरोड़ा ने उपभेक्ता फोरम में वर्ष 2007 में मुकदमा दर्ज कराया था।
इंस्कॉल अस्पताल के वकील ने फोरम के समक्ष कहा कि अस्पताल की सेवा में कोई कमी नहीं रही बल्कि रिश्तेदारों ने स्वयं ही उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती करा दिया था।
फोरम ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अस्पताल को एक महीने के भीतर हर्जाना देने का आदेश दिया है।
मानसिक पीड़ा और शारीरिक उत्पीड़न के लिए 10 लाख रुपये और इंस्कॉल अस्पताल में इलाज पर खर्च हुए 101,858 रुपए के साथ दूसरे अस्पताल में खर्च हुए 691,095 रुपये का मुआवजा देना पड़ेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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