क्रायोजनिक इंजन के मूल्यांकन के बाद होगा रॉकेट का परीक्षण
तिरूवनंतपुरम, 4 जनवरी (आईएएनएस)। स्वदेशी प्रौद्योगिकी से तैयार सुपर कूल्ड ईंधन वाले क्रायोजनिक इंजन का अंतिम मूल्यांकन पूरा नहीं होने के कारण भू-स्थैतिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी-डी3) का परीक्षण फिलहाल रूका हुआ है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने सोमवार को यहां आईएएनएस को बताया, "जीएसएलवी-डी3 को प्रक्षेपित करने से पहले हम स्वदेशी प्रौद्योगिकी से विकसित किए गए क्रायोजनिक इंजन का व्यापक मूल्यांकन कर रहे हैं।"
राधाकृष्णन ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि रॉकेट प्रक्षेपण में कोई विलंब नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि रॉकेट परीक्षण का कार्यक्रम बेंगलुरू में इस महीने के आखिर में होने वाली मूल्यांकन बैठक के बाद तय किया जाएगा।
राधाकृष्णन रविवार से जारी 97वीं राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस में हिस्सा लेने के लिए यहां आए हुए हैं। उन्होंने बताया, "अगले दो हफ्तों में होने वाली मूल्यांकन बैठक में हम प्रक्षेपण का कार्यक्रम तय करेंगे, क्योंकि हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि प्रक्षेपण के बाद क्रायोजनिक इंजन सफलतापूर्वक काम करे। अंतिम जांच का कार्य जारी है।"
स्वदेशी प्रौद्योगिकी से तैयार क्रायोजनिक इंजन से होने वाले प्रक्षेपण से भारत अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और जापान जैसे उन प्रमुख देशों की श्रेणी में आ जाएगा जिनके पास ऐसे इंजनों का निर्माण करने की क्षमता है।
उन्होंने कहा, "हम मार्च में ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के जरिए कार्टासैट-2बी के प्रथम प्रक्षेपण की योजना बना रहे हैं और इसके बाद जीएसएलवी-डी3 का प्रक्षेपण किया जाएगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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