सोरेन फिर बने मुख्यमंत्री

सलमान रावी
बीबीसी संवाददाता, राँची
झारखंड मुक्ति मोर्चे के प्रमुख शिबू सोरेन ने बुधवार को झारखंड राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. वे राज्य के सातवें मुख्यमंत्री हैं.
उनके साथ दो और मंत्रियों ने भी शपथ ली- ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन के सुदेश मेहतो और भारतीय जनता पार्टी के
मंत्रिमंडल में कुल 12 सदस्यों की जगह है.
पिछले 11 महीने से झारखंड में राष्ट्रपति शासन लागू था.शनिवार को शिबू सोरेन ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था.
भारतीय जनता पार्टी गठबंधन सोरेन को समर्थन दे रही है.
भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यू) गठबंधन के पास 20 विधायक हैं, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा के 18 विधायक हैं.
आजसू के पाँच विधायकों ने भी झामुमो सरकार को समर्थन देने का फ़ैसला किया है.
इनके अलावा तीन निर्दलीय विधायकों ने भी सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनाने के लिए अपना समर्थन दिया है.
इस तरह 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में शिबू सोरेन को 46 विधायकों का समर्थन हासिल है.
इस बार चुनाव के बाद राज्य में 25 सीटों के साथ कांग्रेस गठबंधन सबसे बड़ा गठबंधन बनकर उभरा था. लेकिन शिबू सोरेन और कांग्रेस के बीच समझौता नहीं हो पाया था.
राष्ट्रपति शासन
शिबू सोरेन ने 27 अगस्त 2008 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. लेकिन इसके बाद विधानसभा उपचुनाव में वे हार गए थे.तमाड़ विधानसभा क्षेत्र से उन्हें झारखंड पार्टी के उम्मीदवार गोपाल कृष्ण पतार ने नौ हज़ार से ज़्यादा मतों से हराया.
हार के बाद उन्होंने 12 जनवरी को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था क्योंकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार उन्हें मुख्यमंत्री बनने के छह महीने के भीतर विधानसभा का सदस्य निर्वाचित हो जाना चाहिए था लेकिन इस हार के बाद इसकी संभावना ख़त्म हो गई थी.
झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन में नए मुख्यमंत्री को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी.
जनवरी 2009 में कंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफ़ारिश पर झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था.
वर्ष 2008 में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 23 महीने पुरानी कोड़ा सरकार से समर्थन वापस लेते हुए ख़ुद सरकार बनाने का दावा पेश किया था.












Click it and Unblock the Notifications