चिल्का झील में शिकारियों की गतिविधियां फिर शुरू
चिल्का, 26 दिसम्बर (आईएएनएस)। विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि भारत में खारे पानी की सबसे बड़ी विश्व प्रसिद्ध चिल्का झील में शिकारियों ने अपनी गतिविधियां फिर आरंभ कर दी हैं।
अधिकारियों और पक्षी संरक्षण समूहों के वर्ष 2003 में चलाए गए अभियान के बाद झील के किनारे पर स्थित दर्जनों गांवों के निवासियों ने प्रवासी पक्षियों का शिकार बंद कर दिया था। ग्रामीणों को जीविका के वैकल्पिक साधन मुहैया कराने के साथ ही हर वर्ष आने वाले हजारों प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के काम में भी उनको लगाया गया।
परंतु हाल ही में हुईं कुछ गिरफ्तारियों से स्पष्ट हुआ है कि ग्रामीणों ने फिर से शिकार करना आरंभ कर दिया है। इस वर्ष सितम्बर से शिकार करने के आरोप में नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके पास से 34 मृत पक्षी बरामद किए गए।
सहायक वन संरक्षक (वन्यजीव) बी.के.महापात्रा ने आईएएनएस को बताया, "सभी गिरफ्तार लोग झील के किनारों पर स्थित गांवों के निवासी हैं। ये गांव हमेशा से ही शिकारियों के अड्डे के रूप में जाने जाते रहे हैं।"
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी शिकार के आरोपों में करीब 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
भारतीय पक्षी संरक्षण नेटवर्क (आईबीसीएन)के समन्वय बिश्वजीत मोहंती ने कहा कि एक पक्षी संरक्षण समूह श्री श्री महावरी पक्षी सुरक्षा समिति के अध्यक्ष दिबाकर बेहड़ा भी गिरफ्तार लोगों में शामिल हैं। यह काफी शर्मनाक है।
उनके पास से गाडवेल और शॉवेलर जैसी प्रजातियों के 12 प्रवासी पक्षी बरामद किए गए।
मोहंती ने बताया कि बेहड़ा को फरवरी में गिरफ्तार किया गया। राज्य सरकार ने उसके चार महीने पहले ही पक्षियों के संरक्षण में योगदान के लिए बेहड़ा को बीजू पटनायक पुरस्कार दिया था।
विशेषज्ञों के अनुसार पक्षियों के संरक्षण के सरकारी प्रयास कारगर नहीं हो रहे हैं। ग्रामीणों को सही तरीके से प्रेरित करने की आवश्यकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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