'रुचिका के परिवार को मुआवजा मिले, राठौर से सम्मान छीना जाए'
प्रकाश ने शनिवार को आईएएनएस से कहा, "हालांकि ऐसे अपराध में छह महीने की सजा कुछ भी नहीं है लेकिन फिर भी हम संतुष्ट हैं कि अदालत ने राठौर को दोषी माना। अब हम चाहते हैं कि संबद्ध विभाग राठौर से उसको अबतक मिले सभी सम्मान छीन लें।"
रुचिका और उसके परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रकाश और उनकी पत्नी मधु गत 19 वर्षो से लड़ाई लड़ रहे हैं।
गौरतलब है कि 12 अगस्त 1990 को राठौर ने 14 वर्षीया रुचिका के साथ दुर्व्यवहार किया था और इसके तीन साल बाद रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले की एकमात्र गवाह आराधना ही हैं।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने सोमवार को इस मामले में राठौर को छह महीने की सजा सुनाई थी लेकिन 10 मिनट के भीतर ही उसे जमानत पर रिहा कर दिया।
प्रकाश ने कहा, "राठौर राज्य सरकार के संरक्षण के कारण 19 साल तक बचता रहा। इस वजह से रुचिका के परिजनों को न्याय मिलने में देरी हुई, इसके लिए हमारी सरकार भी जिम्मेदार है।"
प्रकाश ने कहा, "राज्य सरकार द्वारा रुचिका के परिजनों को वित्तीय मुआवजा दिलाने के लिए हम अदालत में याचिका दायर करेंगे। हमारे वकील सभी तथ्यों का मूल्यांकन कर रहे हैं और हम जल्द ही याचिका दायर करेंगे।"
रुचिका के भाई आशु को भी पुलिस प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा था। प्रकाश ने कहा, "हम पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में रुचिका मामले को फिर से खोलने और राठौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाने के लिए याचिका दायर करेंगे।"
प्रकाश ने कहा, "मैं पहले अकेले था इसलिए राठौर अपनी इच्छा से हेरफेर करता था लेकिन आज मुझे पूरे समाज का समर्थन प्राप्त है। हमें भरोसा है कि अदालत उसे उसके अपराध के अनुरूप सजा जरूर देगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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