तेलंगाना: अब मंत्री देंगे इस्तीफ़ा

हालांकि क्रिसमस की वजह से 25 दिसंबर को बंद वापस ले लिया गया है लेकिन हैदराबाद और तेलंगाना क्षेत्र के दूसरे हिस्सों में तनाव क़ायम है. हालाँकि तेलंगाना राज्य की माँग दशकों पुरानी है लेकिन कुछ हफ़्ते जब तेलंगाना राष्ट्रीय समिति के चंद्रशेखर राव आमरन अनशन पर बैठे तब इस माँग ने दोबारा तूल पकड़ लिया.
उनके अनशन के ग्यारहवें दिन केंद्र सरकार ने घोषणी की थी कि अलग तेलंगाना राज्य बनाया जाएगा. जहाँ तेलंगाना में जश्न का माहौल शुरु हुआ वहीं रायलसीमा और तटीय आंध्र प्रदेश के राजनीतिक नेताओं और लोगों ने संयुक्त आंध्र प्रदेश की माँग उठाकर अलग तेलंगाना राज्य का विरोध करना शुरु कर दिया और स्थिति ख़ासी पेचीदा हो गई.
ग़ौरतलब है कि तेलंगाना क्षेत्र से जीतकर आंध्र प्रदेश विधानसभा में पहुँचने वाले 119 में से 93 विधायकों ने इस्तीफ़ा स्पीकर को सौंप दिया है जिनका कहना है कि वे हर विधायक को बुलाकर बात करने के बाद फ़ैसला लेंगे. उधर वहाँ से कांग्रेस के 12 में से 11 सांसदों ने इस्तीफ़े कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंप दिए हैं.
कांग्रेस के सिर्फ़ एक सांसद जयपाल रेड्डी ने इस्तीफ़ा नहीं दिया है. वे केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हैं. तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव और उनकी पार्टी की एक और सांसद विजय शांति ने भी इस्तीफ़ा दे दिया है.
तेलंगाना राष्ट्रीय समिति के चंद्रशेखर राव ने कहा, "ये बैठक और प्रदर्शन चिदंबरम के बयान का जवाब हैं. हम सब एक हैं. हम चाहते हैं कि तेलंगाना क्षेत्र के सभी विधायक इस्तीफ़ा दे दें ताकि राज्य में संवैधानिक संकट पैदा हो जाए और रोसैया सरकार गिर जाए......मुझ से वादा किया गया था कि सभी कार्यकर्ताओं और छात्रों के ख़िलाफ़ इस आंदोलन से संबंधित दर्ज मामले वापस ले लिए जाएँगे. तेलंगाना राज्य की माँग सभी की माँग है और इसे माना जाना चाहिए और विश्वविद्यालय परिसरों में स्थिति सामान्य हो जाएगी."
राजनीतिक और ग़ैर-राजनीतिक संगठनों की गुरुवार को हैदराबाद में हुई बैठक के बाद बुद्धिजीवी फ़ोरम के प्रोफ़ेसर के जयशंकर ने कहा, "अब बस एक एक ही सवाल है – केंद्र एक बार स्पष्ट कर दे कि वह तेलंगाना बनाना चाहता है या नहीं...". एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता वेंकटस्वामी ने कहा कि लोगों का गुस्सा चिंदबरम के ताज़ा बयान पर है क्योंकि अब उन्हें लगता है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को टालना चाहती है.
उधर चंद्रशेखर राव ने राजनीतिक और ग़ैर-राजनीतिक संगठनों की बैठक के बाद कहा, "सभी सांसद यहाँ इस्तीफ़े देकर एकत्र हुए हैं. माननीय प्रधानमंत्री से केवल ये कहना है कि अपना वादा निभाएँ...यदि ये माँग नहीं मानी जाती तो सांसदों और विधायकों के इस्तीफ़े के बाद स्थानीय स्तर पर भी जन प्रतिनिधि इस्तीफ़े दे देंगे. केंद्र स्थित को संभाल नहीं पाएगा...इसलिए दिल्ली से घोषणा कीजिए. हमारा संदेश प्रधानमंत्री तक भी पहुँचाएँ... विश्वविद्यालयों से पुलिस वापस बुलाएँ."
केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी ने केंद्र सरकार का बचाव करने का प्रयास किया है.उनका कहना था, "कई बार एक दम ऐसा निर्णय लागू करना संभव नहीं होता है. सरकार चाहती है कि सभी दलों को विश्वास में लेकर सर्वसम्मति से फ़ैसला लिया जाएगा." उधर हैदराबाद सहित तेलंगाना क्षेत्र के वारंगल और करीमनगर से भी तोड़फोड़ और हिंसा की ख़बरें मिल रही हैं. कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुई हैं.
केंद्र सरकार की सर्वसम्मित बनाने और फ़िलहाल तेलंगाना तत्काल बनाने की योजना को टालने की ताज़ा घोषणा के बाद तेलंगाना में 48 घंटे की हड़ताल का आहवान किया गया था. अब उसे 24 घंटे तक सीमित कर दिया गया है क्योंकि ईसाई संगठनों ने क्रिसमस के कारण इसे 25 दिसंबर को जारी न रखने के बारे में अनुरोध किया था.
हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय और उसके बाहर छात्रों और पुलिस के बीच झड़पें हुई हैं और बशीरबाग इलाक़े के निज़ाम कॉलेज के आसपास छात्रों के पथराव के बाद लाठी चार्ज हुआ है और आँसू गैस के गोले छोड़े गए हैं.
हैदराबाद के कई इलाक़ों में दुकानों पर पथराव हुआ है और सरकारी संपत्ति को क्षति पहुँची है. आंध्र प्रदेश पुलिस मुख्यालय की पुलिस महानिरीक्षक एआर अनुराधा ने बीबीसी को बताया, "हमने स्थिति का सामना करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा दल मँगवाए हैं. ये अनुरोध केंद्र सरकार और अन्य राज्यों से किया गया है. इस सुरक्षाकर्मियों को हैदराबाद और अन्य ज़िलों में तैनात किया जाएगा."
कुछ कांग्रेसी विधायकों और सांसदों को भी लोगों का गुस्सा झेलना पड़ा है. विधायक एन जनार्दन रेड्डी और के श्रीहरि के साथ धक्का-मुक्की हुई है और उनकी कार को तोड़ दिया है. ओसमानिया के छात्र बार-बार उनकी पार्टी (कांग्रेस) को तेलंगाना अब तक न बनने का दोषी ठहरा रहे थे. इस दौरान जनार्दन बेहोश हो गए और उन्हें फिर एक सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया.












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