'तेंदुलकर की जिंदगी में दोहरे मानदंडों का कोई स्थान नहीं'

तेंदुलकर को निजी जिंदगी के बारे में बातचीत पसंद नहीं। उन्होंने आज तक अपने पारिवारिक जीवन को लेकर कभी भी किसी को कोई इंटरव्यू नहीं दिया है। इस मामले में अंजलि हमेशा अपने पति से दो कदम आगे रही हैं। अंजलि मीडिया से दूर रहकर पति, बच्चों और अपने अलग 'संसार' में खोई रहती हैं।

देश के अग्रणी प्रकाशकों में से एक 'डायमंड बुक्स' द्वारा प्रकाशित खेल पत्रकार राजशेखर मिश्र की पुस्तक 'सचिन : क्रिकेट का महानायक' में एक ऐसे रोचक वाकये का जिक्र हुआ है जिसमें अंजलि ने अपने पति और आपसी मधुर संबंधों के बारे में कुछ ऐसी बातें बताई हैं, जिनका जिक्र इससे पहले शायद कभी नहीं हुआ। वह अंश इस प्रकार है :

"तेंदुलकर घर पर बहुत सामान्य व्यक्ति हैं, सभी पतियों की तरह। वह घर के कामों में कभी-कभी सहयोग करते हैं, पर हर काम में नहीं। वे सफाई और रोजमर्रा के अन्य काम नहीं करते। पर कभी-कभी खाना पकाने में मदद करते हैं। वे सोचते हैं कि वे बहुत अच्छे खानसामा हैं। वे एक अच्छे पिता हैं और बच्चों पर फिदा हैं। जब भी वह घर पर होते हैं तो बच्चों के साथ खेलना पसंद करते हैं। वे उनके साथ खुद भी बच्चे बन जाते हैं। वे उन्हें चिढ़ाते हैं, उछालते हैं और एक सामान्य पिता की तरह सब काम करते हैं।

उन्हें डिजाइनर कपड़े पसंद हैं, पर उनका कोई खास ब्रांड नहीं है। उन्हें जो भी पसंद आता है वह खरीद लेते हैं। वह मुझे स्कर्ट या अत्याधुनिक कपड़े नहीं पहने देखना चाहते। वे मुझे सलवार कमीज, साड़ी या जींस में देखना पसंद करते हैं। सचिन तो मेरे हेयर स्टाइल का भी बहुत ध्यान रखते हैं। वे चाहते हैं कि मैं बालों को सादा रखूं।

उनका जो गुण मुझे सबसे ज्यादा पसंद है, वह यह है कि जिंदगी में उनके दोहरे मानदंड नहीं हैं। वे खुद के प्रति ईमानदार हैं और अपनी जड़ों से जुड़े हैं। उन्हें सफलता और लोकप्रियता को अपने सिर पर नहीं चढ़ने दिया है। वे घर पर या जनता के बीच एक सुपरस्टार की तरह व्यवहार नहीं करते और बहुत विनम्र बने रहते हैं। वे बहुत पसंद आने वाले इंसान हैं। अब तक तो ऐसा हुआ नहीं कि उन्होंने मेरी बात न मानी हो। वे हमेशा मेरे साथ रहते हैं और मेरी मदद करते हैं।

प्यार जताने के मामले में भी वह बहुत संजीदा हैं। एक वेलेंटाइन डे पर वह विदेश में खेल रहे थे। उन्होंने वेलेंटाइन डे के एक दिन पहले मुझे फोन किया था। मुझसे पूछा कि वेलेंटाइन डे पर मैं क्या करूंगी। मैंने कहा कि शायद मैं अपने लिए 'वेलेंटाइन गिफ्ट' के रूप में एक छोटा सा ब्रेसलेट खरीदूं और उन्होंने कहा ठीक है। पर बात यहीं खत्म नहीं हुई।

अगले दिन सवेरे-सवेरे, वेलेंटाइन डे पर दरवाजे की घंटी बजी और जब मैंने दरवाजा खोला तो एक व्यक्ति भूरे रंग के लिफाफे में एक छोटा सा पार्सल लिए खड़ा था। वह बोला, साहेब ने भेजा है। जब मैंने उसे खोला तो मैं सातवें आसमान पर थी। तेंदुलकर ने एक सुंदर डायमंड नेकलेस भेजा था। वह एक सुंदर सरप्राइज था मेरे लिए। उन्होंने 24 घंटे के भीतर यह सब करने के लिए काफी मेहनत की थी।

अगर मैं उनके स्वभाव में कुछ बदलना चाहूंगी तो उनकी विनम्रता को बदलूंगी। वह बहुत विनम्र हैं। मैं वह दिन हमेशा याद करती हूं जब उन्होंने मुझे बताया कि वे अपने माता-पिता से हमारी शादी की बात करने वाले हैं। कई बार जब महिलाएं उनके पास आकर फ्लर्ट करने की कोशिश करती हैं तो मैं उनसे ईष्र्या या घृणा नहीं करती। मेरे लिए यह सामान्य बात है, क्योंकि मैं समझती हूं कि वह सुपर स्टार हैं, इसलिए यह तो होगा ही।

इसके अलावा खेल के बारे में मेरी जानकारी बहुत सीमित है। वह मुझसे क्रिकेट की बातें कम करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि मुझे क्रिकेट के बारे में कुछ भी पता नहीं। हां, इस विषय पर अपने भाई अजित से वे बहुत बातें करते हैं। उनसे मेरी आज तक कोई बहस नहीं हुई।"

'पुस्तक अंश- सचिन : क्रिकेट का महानायक, लेखक- राजशेखर मिश्र, प्रकाशक-डायमंड बुक्स'

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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