आंध्र में राजनीतिक संकट बढ़ा, बंद से जनजीवन प्रभावित (लीड-1)
चिदंबरम ने बुधवार को कहा था कि आंध्र प्रदेश में हालात बदल चुके हैं और राजनीतिक दल इस मुद्दे पर बंट गए हैं। उनके इस बयान से क्षेत्र के लोगों को ऐसा लगा कि केंद्र सरकार ने पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के मसले पर 'यू टर्न' ले लिया है। इसके बाद छात्र और विभिन्न दलों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। इस क्षेत्र में बुधवार देर रात कई जगहों पर हिंसा भी हुई।
राज्य में सड़क परिवहन निगम (आरटीसी) ने तेलंगाना क्षेत्र में सभी बस सेवाएं स्थगित कर दीं। यहां निजी वाहन भी सड़कों से नदारद रहे। तेंलगाना में दुकानें, कारोबारी प्रतिष्ठान, पेट्रोल पंप, सिनेमा हॉल और शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। तनाव को देखते हुए यहां एक स्थान पर पांच या इससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगा दी गई है और पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया है।
तेलंगाना समर्थकों ने केंद्र सरकार पर क्षेत्र की जनता के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। उन्होंने बसों, ट्रकों और सरकारी दफ्तरों को आग लगा दी। हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में फिर से प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों ने जामिया उस्मानिया रेलवे स्टेशन को आग लगा दी। हालांकि टीआरएस के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने और कांग्रेस के नेताओं ने जनता से शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की है।
आरटीसी अधिकारियों ने बताया कि तेलंगाना में प्रदर्शनकारियों ने 150 से अधिक बसों को क्षतिग्रस्त कर दिया और निजामाबाद जिले में एक सरकारी कार्यालय की इमारत को आग के हवाले कर दिया।
इस बीच, केंद्र के इस रवैये के विरोध में इस क्षेत्र से कांग्रेस के सांसदों ने गुरुवार को इस्तीफा देने का फैसला किया। निजामाबाद से कांग्रेस सांसद मधु याश्की गौड़ और करीमनगर से पार्टी सांसद पूनम प्रभाकर ने तेलंगाना की जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।
तेलंगाना से पार्टी के सांसद नई दिल्ली में नलगोंडा से सांसद जी. सुधाकर रेड्डी के आवास पर बैठक करेंगे। इस बैठक में फैसला किया जाएगा कि इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंपा जाए या फिर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को भेजा जाए।
गौड़ ने तटीय आंध्र और रायलसीमा के सभी सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों पर तेलंगाना को लेकर ब्लैकमेलिंग की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया है।
उन्होंने मौजूदा संकट के लिए कडप्पा से कांग्रेस के सांसद वाई. एस. जगनमोहन रेड्डी को जिम्मेदार ठहराया। गौड़ ने कहा, "कुछ लोग पहले ही पार्टी को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर चुके थे, वे ही इस हालात के जिम्मेदार हैं।"
गौरतलब है कि तेलंगाना क्षेत्र से लोकसभा में 17 सदस्य हैं जिनमें 12 सदस्य कांग्रेस के हैं। तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीरआरएस)के प्रमुख के. चंद्रशेखर राव सहित टीआरएस के दोनों सांसद पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।
वैसे तेलंगाना में कुछ दिनों पहले ही हिंसक प्रदर्शन हुए थे। विगत 29 नवंबर को तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) प्रमुख के. चंद्रशेखर राव की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में कई दिनों तक प्रदर्शन चला था। इसी कारण सरकार ने पृथक तेलंगाना के गठन की मांग स्वीकार की थी।
इसके बाद पृथक तेलंगाना के विरोध में आंध्र व रायलसीमा के क्षेत्र में भी प्रदर्शन शुरू हो गया। यहां राजनीतिक संकट गहरता देख सरकार ने नया बयान दिया और फिर तेलंगाना में प्रदर्शन का दौर आरंभ हो गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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