तेलंगाना पर सरकार के नरम रुख से टीआरएस हुई गरम (राउंडअप)
केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने नई दिल्ली में एक बयान जारी कर कहा कि अलग तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर सर्वसम्मति बनाने के लिए सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि तेलंगाना की परिस्थतियां आज बदल गई हैं और इस मुद्दे पर राज्य के सभी राजनीतिक दल बंटे हुए हैं।
चिदम्बरम ने कहा, "केंद्र सरकार की तरफ से तेलंगाना के संबंध में गत नौ दिसम्बर को एक बयान जारी किया गया था। हालांकि उसके बाद अब तक राज्य की परिस्थितियां बहुत बदल चुकी हैं। राजनीतिक दल इस मुद्दे पर बंटे हुए हैं। इस पर सहमति बनाने के लिए सभी राजनीतिक दलों से व्यापक विचार-विमर्श की आवश्यकता है।"
उन्होंने कहा कि सरकार वार्ता की इस प्रक्रिया में सभी पक्षों की चिंताओं का ध्यान रखेगी। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश की जनता, वहां के सभी राजनीतिक दलों और छात्रों से अपील करती है कि वे अपने प्रदर्शन वापस लें और राज्य में शांति और भाईचारे का माहौल बनाएं।"
तेलंगाना के मुद्दे पर बुधवार को ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर एक विशेष बैठक हुई जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी, चिदम्बरम, कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली और सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने हिस्सा लिया।
चिदम्बरम के बयान के कुछ घंटों के बाद ही तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके अलावा पार्टी के पांच विधायकों ने भी विधानसभा अध्यक्ष को अपने इस्तीफे भेज दिए हैं।
राव ने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अपना इस्तीफा भेजा। टीआरएस सूत्रों के मुताबिक तेलंगाना राज्य के मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालने का विरोध करते हुए राव ने फैक्स के जरिए कुमार को अपना इस्तीफा भेजा।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा में टीआरएस के दो सदस्य हैं। राव के अलावा पार्टी के पांच विधायकों ने भी विधानसभा अध्यक्ष किरुणाकर रेड्डी को अपना इस्तीफा भेजा है। राज्य विधानसभा में टीआरएस के 10 सदस्य हैं।
इससे पहले, संप्रग सरकार पर क्षेत्र की जनता के साथ छलावा करने का आरोप लगाते हुए टीआरएस ने 48 घंटे के बंद का आान किया। पार्टी ने यह भी कहा है कि क्षेत्र के सभी सांसद और विधायक दलगत भावना से ऊपर उठकर अपने पदों से सामूहिक इस्तीफा देंगे। इसकी शुरुआत उन्होंने अपने इस्तीफे से की।
राव ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "केंद्र सरकार ने तेलंगाना के मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। तेलंगाना की जनता के साथ एक बार फिर छलावा हुआ है। सरकार ने जो बयान जारी किया है उसमें न तो स्पष्टता है और न ही समय सीमा का जिक्र है।"
उन्होंने सवाल करने के अंदाज में कहा, "तेलंगाना राज्य के गठन में और कितना वक्त लगेगा। और कितने लोगों को इसके लिए अपनी कुर्बानी देनी होगी।"
इस घोषणा के दौरान कांग्रेस और प्रजा राज्यम पार्टी (पीआरपी) के विधायक भी राव के साथ थे। राव ने युवाओं और छात्रों से अपील की कि वे बंद के दौरान शांतिपूर्ण रवैया अपनाए।
राव ने घोषणा कि गांव से लेकर संसद तक के सभी जनप्रतिनिधि सामूहिक इस्तीफा देंगे। उन्होंने कहा, "हम सभी एक बैनर के तले आ जाएंगे और लाइन में खड़े होकर अपने इस्तीफे सौंपेंगे।"
उन्होंने कहा कि आगे की रणनीति तय करने के लिए अलग तेलंगाना राज्य की लड़ाई लड़ रहे सभी राजनीतिक दलों की गुरुवार को एक संयुक्त कार्रवाई समिति गठित की जाएगी।
इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के ताजा रुख से तेलंगाना क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। विभिन्न स्थानों पर सरकार के खिलाफ बुधवार को प्रदर्शन जारी रहा और उसने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया।
टीआरएस के अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राज्य के विभिन्न छात्र संगठनों ने भी गुरुवार को तेलंगाना में बंद का आान किया है।
राज्य में उस वक्त तनाव और बढ़ गया जब उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्र बुधवार को फिर सड़कों पर उतर आए और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। इन छात्रों ने 10 बसों को नुकसान पहुंचाया और टारनाका क्षेत्र में दुकानों को जबरदस्ती बंद करवाया।
उस्मानिया विश्वविद्यालय में भारी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। यह विश्वविद्यालय पिछले सप्ताह 11 दिनों तक चले तेलंगाना समर्थक आंदोलन का केंद्र रहा है। अन्य विश्वविद्यालयों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
निजाम कॉलेज के छात्रों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्रों ने भी आज विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किया। राज्य के विभिन्न कोनों से भी इसी प्रकार के विरोध की खबरें हैं।
इससे पहले, प्रदेश के वारंगल कस्बे में तेलंगाना समर्थक छात्रों और पुलिस के बीच टकराव भी हुआ। 'जय तेलंगाना' का नारा लगाते हुए ककटिया विश्वविद्यालय के छात्र विश्वविद्यालय परिसर में तैनात पुलिसकर्मियों से भिड़ गए। छात्र सभी विधायकों से अपनी राजनीतिक संबद्धताओं से ऊपर उठ कर इस्तीफा देने की मांग कर रहे थे।
इसके बाद छात्र कांग्रेस और तेदेपा के कार्यलय में तालाबंदी के लिए चले गए। इस बीच यह अफवाह उड़ रही थी कि केंद्र सरकार पृथक तेलंगाना के अपने रुख से पीछे हट गई है।
मुख्यमंत्री के.रोसया ने कैबिनेट के सहयोगियों और शीर्ष पुलिस अधिकारियों के साथ हालात की समीक्षा की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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