'जनाज़े के बाद विपक्ष के साथ झड़पें'

हुसैन अली मुंतज़री का नाम ईरान सरकार के आलोचकों में सबसे प्रतिष्ठित और बड़ा था. उनके अंतिम संस्कार के लिए तीर्थनगर कूम में हज़ारों लोग जमा हुए थे. आयतुल्ला मुंतज़री के जनाज़े के साथ राष्ट्रपति पद के विपक्षी उम्मीदवार रहे मीर हुसैन मुसवी और मेहदी कुरूबी उनके घर से कब्रगाह तक गए.
कई वेबसाइटों पर कहा गया है कि जब वे जनाज़े के बाद तेहरान लौट रहे थे तो मोटरसाइकल पर सवार कुछ लोगों ने हुसैन मुसवी पर हमला किया और कार की एक खिड़की तोड़ दी गई. रविवार की रात को सैकड़ों लोगों ने मोमबत्तियाँ जलाकर अयातुल्ला मुंतज़री को याद किया.भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने विपक्ष समर्थक नारे लगाए.
विरोध प्रदर्शन
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस घटना ने विपक्ष के प्रदर्शनों को एक नई आवाज़ दे दी है और इस हफ़्ते और प्रदर्शन हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि ईरानी अख़बारों को आयतुल्ला मुंतज़री के निधन के बारे में लिखने से रोका गया है और निर्देश दिया गया है कि इस मामले में सिर्फ़ सर्वोच्च नेता का शोक संदेश प्रकाशित किया जाए.
ईरान सरकार के लिए यह थोड़ी कठिन स्थिति है क्योंकि मुंतज़री की शोक सभा के नाम पर हो रहे प्रदर्शनों पर रोक लगाना मुश्किल होगा, यही वजह है कि सरकार लोगों की आवाजाही पर तरह तरह के प्रतिबंध लगा रही है. यहाँ तक कि इंटरनेट के इस्तेमाल को भी रोकने की कोशिशें की गई हैं. अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने वाले अकबर नाम के एक विपक्षी कार्यकर्ता ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि बहुत कड़ी सुरक्षा के बीच मुंतज़री को शांतिपूर्वक दफ़ना दिया गया.
ऐसे समाचार भी हैं कि कुछ स्थानों पर सुरक्षाकर्मियों और विपक्ष के समर्थकों के बीच टकराव हुआ है. सरकार को आशंका है कि मुंतज़री की अंतिम विदाई के ज़रिए विपक्ष एकजुट हो सकता है.बीबीसी फ़ारसी टीवी के प्रसारण को रोकने की भी कोशिशें की गई हैं. हालांकि बीबीसी का कहना है कि लोगों तक समाचार पहुंचाने की हरसंभव कोशिश जारी रहेगी.












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