सकारात्मक भावनाओं को बनाए नहीं रख सकते अवसादग्रस्त लोग

इससे पहले इस विषय पर हुए शोध में कहा गया था कि अवसादग्रस्त लोग सकारात्मक भावनाओं से जुड़ी गतिविधियों को लेकर दिमागी रूप से कम सक्रिय होते हैं लेकिन नए शोध के निष्कर्ष ने इस बात को झुठला दिया है।

नए शोध के मुताबिक अवसादग्रस्त लोगों में भी सकारात्मक भावनाएं उतनी ही उठती हैं, जितनी एक स्वस्थ इंसान के मस्तिष्क में उठती हैं। यह अलग बात है कि अवसादग्रस्त लोग इन भावनाओं को ज्यादा देर तक अपने अंदर बनाए रखने में नाकाम होते हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कोंसिन मेडिसन (यूडब्ल्यू-एम) के स्तानक छात्र एरॉन हेलर के नेतृत्व में हुए शोध से यह बात सामने आई है कि एनहेडोनिया के कारण अवसादग्रस्त लोग अपने अंदर खुशी की भावनाओं को देर तक बनाए नहीं रख सकते।

एरॉन हेलर और उनके साथियों ने 27 अवसादग्रस्त रोगियों और 19 साधारण लोगों पर किए गए शोध के माध्यम से यह निष्कर्ष निकाला है।

इसके लिए एरॉन हेलर की टीम ने 'फंक्शनल मैगनेटिक रेजोनेंस इमेजिंग' (एफएमआरआई) प्रणाली का उपयोग किया। इस प्रणाली के तहत किसी विशेष हिस्से में दिमाग की हरकतों को महसूस किया जा सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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