तेलंगाना के विरोध में बंद और प्रदर्शनों का दौर जारी (राउंडअप)

इस मसले पर शुक्रवार को लोकसभा में तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) और कांग्रेस सदस्यों के बीच तीखी नोंक-झोंक की वजह से सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। हंगामा और शोरगुल इस कदर बढ़ा कि लोकसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करनी पड़ी।

उधर केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें यह पता नहीं है कि इस विवाद का हल कब होगा। संसद के बाहर संवाददाताओं ने जब चिदंबरम से तेलंगाना विवाद के समाधान को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि 'पता नहीं'।

आंध्र प्रदेश में तटीय आंध्र और रायलसीमा के सभी जिलों में शुक्रवार को बंद और प्रदर्शन की वजह से आम जनजीवन प्रभावित रहा। इन इलाकों में सभी शैक्षणिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। कुछ इलाकों से छिटपुट हिंसा की भी खबरें आई। विशाखापट्टनम, पूर्वी गोदावरी और पश्चिमी गोदावरी जिलों में भी बंद का आह्वान किया गया।

कृष्णा जिले के विजयवाड़ा शहर में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। यहां तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के विधायक डी. उमामहेश्वर राव का आमरण अनशन छठे दिन भी जारी है। उनके साथ तेदेपा के दो और नेता अनशन पर हैं। इन सभी को अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

दूसरी ओर कांग्रेस सांसद एल. राजगोपाल और उनके समर्थक भी अनशन कर रहे हैं। विजयवाड़ा में प्रदर्शनकारियों ने फेडरल बैंक की शाखा, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के कार्यालय और एक कॉलेज पर हमला कर दिया। कड़प्पा जिले में दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस.राजशेखर रेड्डी के भाई वाई.एस. विवेकानंद रेड्डी का अनशन शुक्रवार को चौथे दिन भी जारी है। अनंतपुर जिले में तेदेपा विधायक पारिताला सुनीता भी पांच दिनों से अनशन पर बैठी हैं।

तेदेपा नेताओं ने शुरू की 'बस यात्रा' :

एक ओर जहां तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू पृथक तेलंगाना के मुद्दे पर दुविधा की स्थिति में हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हीं की पार्टी के तटीय आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र के विधायकों ने शुक्रवार को 'एकीकृत आंध्र' के लिए एक 'बस यात्रा' शुरू कर दी है।

पृथक तेलंगाना की मांग के विरोध में पहले ही विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप चुके तेदेपा विधायकों ने रायलसीमा क्षेत्र के चित्तूर जिले के तिरुपति से अपनी यात्रा शुरू कर दी है।

वरिष्ठ नेता वाई. रामकृष्णुडु के नेतृत्व में तेदेपा नेताओं ने तिरुपति से श्रीकाकुलम के लिए 11 दिवसीय यात्रा शुरू कर दी है। यह 'बस यात्रा' 13 जिलों से होकर गुजरेगी, जिनमें रायलसीमा के चार और तटीय आंध्र के नौ जिले शामिल हैं।

पूर्व मंत्री रामकृष्णुडु ने पत्रकारों से कहा, "हम आंध्र प्रदेश के विभाजन को कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे और एकीकृत आंध्र के आंदोलन को मजबूत करने के लिए हमने यह कार्यक्रम शुरू किया है।"

दोनों क्षेत्रों के करीब एक दर्जन विधानसभा और विधान परिषद सदस्य और कुछ अन्य वरिष्ठ नेता बस में यात्रा करेंगे। पृथक तेलंगाना के विरोध का आंदोलन शुरू करने के लिए करीब 45 तेदेपा विधायकों ने पहले ही अपने इस्तीफे दे दिए हैं।

शुरुआत में पृथक तेलंगाना की मांग को विधानसभा में समर्थन देने की बात कह चुके तेदेपा प्रमुख नायडू अब दुविधा की स्थिति में हैं क्योंकि उन्हीं की पार्टी के कुछ नेताओं ने नायडू को चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने इस मांग का समर्थन किया तो वे पार्टी छोड़कर एक अलग क्षेत्रीय दल बना लेंगे।

तेदेपा नेता व तेलंगाना से विधायक ई. दयाकर राव ने शुक्रवार को वारंगल में पत्रकारों से कहा कि नायडू 'बस यात्रा' में शामिल होने वाले कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे।

तिरुपति पहुंचे चिरंजीवी :

अभिनेता से राजनेता बने के. चिरंजीवी आंध्र प्रदेश के विभाजन के विरोध में चल रहे आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए शुक्रवार को मंदिरों के शहर तिरुपति पहुंचे। पृथक तेलंगाना के मुद्दे पर अपना मत बदलने और विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपने के बाद प्रजा राज्यम पार्टी (पीआरपी) के अध्यक्ष तिरुपति पहुंचे। तिरुपति चिरंजीवी का विधानसभा क्षेत्र है।

पीआरपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चिरंजीवी का यहां स्वागत किया। वह रायलसीमा और तटीय आंध्र के विभिन्न शहरों और गांवों में पृथक तेलंगाना के विरोध में चल रहे आंदोलन में हिस्सा लेंगे।

चिरंजीवी ने गुरुवार को घोषणा की थी कि बहुसंख्य लोगों की इच्छा के मुताबिक उन्होंने 'एकीकृत आंध्र' के लिए चल रहे आंदोलन में शामिल होने का निर्णय लिया है।

यद्यपि चिरंजीवी के इस बयान पर तेलंगाना में उनकी पार्टी के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है। इस क्षेत्र के पीआरपी के दो विधायकों ने अपना इस्तीफा देने का निर्णय लिया है जबकि पार्टी की विभिन्न जिला इकाइयों के अध्यक्ष ने अपना इस्तीफा दे दिया है।

केंद्र सरकार द्वारा तेलंगाना के गठन की प्रक्रिया को शुरू करने पर सहमति देने के बाद नौ दिसम्बर से अब तक पीआरपी के 18 विधायकों में से 15 विधायकों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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