कोपेनहेगन का नतीजा आशा के अनुरूप नहीं : प्रधानमंत्री (लीड-2)
कोपेनहेगन, 18 दिसम्बर (आईएएनएस)। जलवायु परिवर्तन पर यहां जारी शिखर सम्मेलन में भारत ने अपने आप को विकासशील देशों के पाले में रखते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के किसी भी वैश्विक समझौते में टिकाऊ विकास की अवधारणा पर निश्चित तौर पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
सम्मेलन की अनौपचारिक उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "यहां कोपेनहेगन में चल रहा सम्मेलन संभवत: हमारी आशाओं पर खरा न उतरे फिर भी यह एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। मैं ग्लोबल वार्मिग से निपटने के लिए एक वैधानिक समझौते हेतु वर्ष 2010 में एक और सम्मेलन बुलाने का समर्थन करता हूं।"
इस सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनेसियो लुला डी सिल्वा, चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।
मनमोहन सिंह ने कहा, "जब हम भविष्य की वार्ता प्रारंभ करें, तब हमें पिछले दो वर्षो के दौरान ली गई सीखों को ध्यान में रखना होगा। मैंने तीन सीखें ली हैं।"
पहला, अधिकतर देश जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन में बदलाव या उस पर फिर से सौदेबाजी के विरोध में हैं।
प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए वर्ष 2007 में तैयार बाली एक्शन प्लान के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "यह योजना कन्वेंशन के अमलीकरण को विस्तारित करने के लिए हमें बाध्य करती है।"
उन्होंने तीसरी चीज के बारे में कहा, "जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए किसी भी नए समझौते में टिकाऊ विकास पर जरूर ध्यान दिया जाना चाहिए। नए समझौते में जिम्मेदारियों का बराबरी का बंटवारा होना चाहिए।"
सम्मेलन के अंतिम दिन मनमोहन सिंह ने जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए भारत द्वारा स्वैच्छिक रूप से घोषित कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें जलवायु परिवर्तन पर नेशनल एक्शन प्लान के तहत आठ कदमों में महत्वाकांक्षी सौर मिशन और वर्ष 2020 तक 2005 के मुकाबले प्रति युनिट जीडीपी पर कार्बन उत्सर्जन में 20 प्रतिशत की कटौती शामिल है। उन्होंने जोर दिया कि कोपेनहेगन सम्मेलन के नतीजों से परे भारत अपना लक्ष्य हासिल करेगा।
'समान बोझ- हिस्सेदारी' पर जोर देते हुए सिंह ने दुनिया के नेताओं से 1997 के क्योटो प्रोटोकॉल और जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन को नहीं छोड़ने की अपील की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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