गैस कीमतों को नियंत्रित करने का अधिकार सरकार के पास : आरआईएल
नई दिल्ली, 17 दिसम्बर (आईएएनएस)। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि यदि यह फैसला दिया गया कि उत्पादन साझेदारी सौदों में सरकार को कीमतें तय करने का अधिकार नहीं है तो सरकार इस फैसले को भी बदल सकती है।
आरआईएल के वकील हरीश साल्वे ने प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ के सामने कृष्णा-गोदावरी बेसिन की गैस आपूर्ति पर रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (आरएनआरएल) के साथ जारी कानूनी विवाद में यह तर्क दिया। खंडपीठ में न्यायाधीश बी.सुदर्शन रेड्डी और पी.सथशिवम भी शामिल हैं।
साल्वे ने न्यायालय से कहा, "यदि गैस के उपयोग की नीति को चुनौती दी गई और न्यायालय ने कहा कि माफ करिये सरकार के पास अधिकार नहीं है, तो सरकार दूसरे तरीके से अधिकार खोज लेगी।"
उन्होंने जोर दिया कि उत्पादन साझेदारी समझौते और गैस के उपयोग की नीति के प्रावधानों के तहत सरकार को गैस की कीमतें तय करने का पूरा अधिकार है। उनके अनुसार अधिकारी इसे आवश्यक वस्तु कानून के तहत भी निकाल सकते हैं।
आरआईएल के गैस उपयोग की नीति को चुनौती नहीं देने का स्पष्टीकरण देते हुए साल्वे ने कहा कि आरएनआरएल ने भी अन्य उपभोक्ताओं के लिए गैस की कीमतें तय करने के अधिकार को चुनौती नहीं दी।
उन्होंने कहा, "सरकार ने कई क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया है। यदि हमने जिम्मेदारी से व्यवहार नहीं किया तो 15 दिनों तक मुनाफा कमा सकते हैं लेकिन अंत में हम व्यापार से बाहर हो जाएंगे।"
आरआईएल के वकील ने 17 वर्षो तक 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर से प्रतिदिन 2.8 करोड़ यूनिट गैस की आपूर्ति के एक समझौते के आरएनआरएल के दावे का भी खंडन करना चाहा।
उन्होंने कहा कि अनिल अंबानी समूह की रिलायंस एनर्जी लिमिटेड के साथ केवल दादरी बिजली परियोजना को गैस उपयोग नीति के तहत गैस आपूर्ति का समझौता हुआ था। इसकी कीमत विशेष अधिकार प्राप्त मंत्रियों के दल से अनुमोदित फार्मूले पर आधारित थी।
साल्वे ने कहा कि मंत्री समूह का निर्णय आरआईएल द्वारा उत्पादित सभी गैस पर लागू है। इसके साथ ही किसी भी कंपनी को केवल पांच वर्ष तक गैस आपूर्ति की प्रतिबद्धता की जा सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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