सीमा सड़क संगठन में कर्मचारियों की कमी से काम प्रभावित

बीआरओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "बीआरओ में कुल 42,646 पद स्वीकृत हैं लेकिन केवल 34,966 पदों पर अधिकारी व कर्मचारी तैनात हैं।"

संगठन में अधिकारियों के 1,540 पद हैं लेकिन केवल 880 पदों को ही भरा जा सका है। बीआरओ चीन से लगे पूर्वोत्तर के राज्यों और जम्मू एवं कश्मीर के लद्दाख के खतरनाक पहाड़ी इलाकों कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है।

अधिकारी का कहना है कि देश के दूरदराज के संवेदनशील इलाकों में काम की कठोर और जटिल शर्ते, परिवार रखने की असुविधा, नक्सलवाद और उग्रवाद की वजह से नौजवानों को बीआरओ से जोड़ने में बाधा आ रही हैं।

कर्मचारियों के कमी के चलते भारत-चीन सीमा पर निर्माणाधीन 61 सड़कों का काम अधर में लटका हुआ है। इसमें से केवल 12 सड़कें ही बन पाई हैं और 49 सड़कों को बनाने में देरी हो रही है।

ज्यादातर सड़कें ऊंचाई वाले इलाकों से गुजरती हैं जहां काम के लिए उपयुक्त मौसम और उपलब्ध समय सीमित होता है। इन इलाकों में मजदूर नहीं मिलते। बहुत सारे मजदूर स्थानीय स्तर पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम के लिए चले जाते हैं।

अधिकारी ने कहा कि इन दुर्गम इलाकों में बढ़िया ठेकेदार भी नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि सरकार इसके लिए कई कदम उठाने जा रही है, बजट में बढ़ोतरी कर बीआरओ की क्षमता बढ़ाई जा रही है। लोक सेवा आयोग और जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स सेन्टर, पुणे से कर्मचारियों की भर्ती की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और बाहर से भी काम करवाया जाएगा।

अधिकारी ने खुलासा किया कि मजदूरों की भर्ती में झारखण्ड और उड़ीसा की सरकार से सहयोग मांगा गया है। ठेकेदारों और दिहाड़ी मजदूरों को आकर्षित करने के लिए कई तरह की सुविधाएं देने के आश्वासन दिए जा रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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