जलवायु परिवर्तन पर उचित समझौते पर जोर दे भारत : अर्मत्य सेन
सेन ने यहां एस्पेन इंस्टीट्यूट इंडिया नाम की प्रमुख संस्था की ओर से आयोजित समारोह में कहा, "भारत को जलवायु परिवर्तन पर उचित और न्यायसंगत समझौते पर पहुंचने की कोशिश करने की जरूरत है।"
हावर्ड विश्वविद्यालय में इतिहास और अर्थशास्त्र के प्रोफेसर सेन ने कहा, "प्रदूषण के लिए भारत ज्यादा जिम्मेदार नहीं है, लेकिन वह यह कहकर बच नहीं सकता कि वह बाध्यकारी दायित्व पूरा नहीं करेगा।.."
उन्होंने जोर देकर कहा, "हम यह नहीं कह सकते कि हम कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे। नहीं तो कोई भी समझौता नहीं हो सकेगा।"
ग्लोबल क्लाइमेट जस्टिस के लेखक ने संकेत दिया कि भारत और चीन की ओर से प्रतिबद्धताएं व्यक्त नहीं होने की सूरत में अमेरिका किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा।
सेन की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत कार्बन कटौती प्रतिबद्धताओं स्वीकार करने के लिए विकसित देशों की ओर से दबाव में है।
जलवायु परिवर्तन के मसले पर कोपेनहेगन में जारी 192 देशों की शिखर बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शिरकत करेंगे। वह समग्र, न्यायसंगत और संतुलित नतीजे के लिए जोर दे सकते हैं।
बुधवार को विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा था कि भारत उत्सर्जन की मात्रा में कटौती की कानूनी बाध्यतओं, उत्सर्जन के लिए चरम अवधि को स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही वह अपने संसाधनों से की जाने वाली घरेलू जलवायु परिवर्तन कार्रवाइयों को अंतर्राष्ट्रीय जांच के दायरे में लाने की इजाजत नहीं देगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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