शोपियां कांड को लेकर कश्मीर में फिर उबाल (लीड-1)
क्रुद्ध युवकों ने सीबीआई के खिलाफ नारेबाजी की, उस सीबीआई के खिलाफ जिसने अपनी रिपोर्ट में उन आरोपों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि दोनों महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था और उसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। अलबत्ता रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों महिलाओं की मौत नाले में डूबने के कारण हुई।
जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय में सोमवार को सौंपी गई 66 पृष्ठों की अपनी रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा है कि नीलोफर जान (22) और आसिया जान (17) की मौत 29 मई को जावूरा पुल के पास रामबियारा नाले में दुर्घटनावश डूबने के कारण हुई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात के भी कोई सबूत नहीं हैं कि दोनों के डूबने के पीछे का कारण आत्महत्या करना था।
प्रदर्शनकारी कई इलाकों में सड़कों पर उतर आए और उन्होंने पुलिस व केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) पर भारी पथराव शुरू कर दिया।
सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए शुरू में लाठीचार्ज किया, लेकिन जब युवक मैसुमा, बटमालू, डांडरखाह, नौगाम और इस पुराने शहर के अन्य इलाकों की गलियों में फिर से जमा होने लगे तो पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे।
रिपोर्ट के विरोध में आयोजित हड़ताल के कारण घाटी में जनजीवन ठप्प हो गया। हड़ताल का आह्वान शोपियां मजलिस मुशावरात ने किया था। हुर्रियत कांफ्रेंस के दोनों धड़ों ने हड़ताल का समर्थन किया।
उच्च न्यायालय की खंडपीठ के सामने सोमवार को पेश अपनी 66 पेज की रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा कि नीलोफर जान (22 वर्ष) और उसकी ननद आसिया जान (17 वर्ष) की मौत पानी में डूबने से हुई थी।
स्थानीय लोगों ने दोनों युवतियों की बलात्कार के बाद हत्या किए जाने का आरोप लगाया था। कथित हत्या के विरोध में शोपियां मजलिस मुशावरात ने 47 दिन तक शोपियां कस्बे में बंद रखा था।
मंगलवार को श्रीनगर और घाटी के अन्य कस्बों में दुकानें बंद रहीं और यातायात प्रभावित हुआ।
अधिकारियों ने हुर्रियत के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारुक, शब्बीर शाह और नईम खान सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं को मंगलवार सुबह उनके घरों में कैद कर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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