बर्फ पिघलने के खतरनाक प्रभाव

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार रिपोर्ट में कहा गया है कि बर्फ की कम मात्रा का मतलब यह होता है कि अधिक मात्रा में सौर विकिरण ग्रहण किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्कटिक सागर के बर्फ क्षेत्र में भारी कमी आई है। वर्ष 2007, 2008 और 2009 की गर्मियों के दौरान वर्ष 1979 से लेकर अब तक सबसे कम मात्रा में बर्फ पाई गई थी।

'मेल्टिंग स्नो एंड आइस : ए काल फॉर एक्शन' नामक यह रिपोर्ट अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति अल गोर और नार्वे के विदेश मंत्री जोनास गर स्टोर ने इस वर्ष के प्रारंभ तैयार कराई थी। अल गोर वर्ष 2007 में शांति के नोबेल पुरस्कार के सह विजेता रहे हैं।

दोनों नेताओं ने इस रिपोर्ट को कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर चल रहे शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत किया।

गोर और स्टोर, दोनों ने वैश्विक ग्रीनहाउस गैस में कटौती का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने कहा, "मानव निर्मित खतरनाक जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए अन्य किसी उपाय के बारे में हमें जानकारी नहीं है।" दोनों ने कहा, "हमारे तमाम प्रयासों के बावजूद हम संभवत: आर्कटिक और हिमनद के वातावरण में कुछ बदलावों को नहीं रोक सकते।"

रिपोर्ट में कहा गया है, "धरती का बर्फ पिघलने की घटना अब समुद्र के स्तर को बढ़ाने में प्रभावी रूप से योगदान कर रही है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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